चारामा: कहते हैं कि खेती किस्मत का खेल है, लेकिन मंगलवार की शाम चारामा क्षेत्र के किसानों पर कुदरत का जो कहर टूटा, उसने उनकी कमर तोड़कर रख दी है। महज आधे घंटे की तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश ने उन फसलों को मिट्टी में मिला दिया, जिन्हें किसान पिछले तीन महीनों से अपनी आंखों की पुतली की तरह सींच रहे थे।
कटाई की दहलीज पर खड़ी फसल बर्बाद
खेतों में धान की फसल पककर तैयार थी, बालियां लहरा रही थीं और किसान महज कुछ दिनों बाद कटाई शुरू करने की योजना बना रहे थे। लेकिन मंगलवार की शाम अचानक मौसम ने करवट ली और 100 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने खड़ी फसल को जमीन पर सुला दिया। देखते ही देखते लबालब भरे पानी में डूबी फसल अब बर्बाद होने की कगार पर है।
सपनों पर फिरा पानी, कर्ज की चिंता ने घेरा
यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि उन उम्मीदों की हार है जो किसानों ने इस सत्र से लगाई थी।
आर्थिक संकट:* कई किसानों ने इस उम्मीद में मेहनत की थी कि फसल बेचकर वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेंगे या घर की जरूरतों को पूरा करेंगे।
कर्ज का बोझ:* क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने साहूकारों या बैंकों से कर्ज लेकर बीज और खाद का इंतजाम किया था। अब फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे कर्ज कैसे चुकाएंगे और अगले सीजन की तैयारी कैसे करेंगे?
किसानों की सुबक:
कड़ी धूप और हाड़तोड़ मेहनत करने वाले अन्नदाता आज बेबस और चिंतित हैं। गिरे हुए धान के पौधों को देखते हुए किसानों की आंखों में आंसू साफ देखे जा सकते हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपना खून-पसीना एक कर दिया था, लेकिन प्रकृति के इस क्रूर प्रहार ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब किसानों की निगाहें प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं। प्रभावित किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे (गिरदावरी) कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाए ताकि वे इस बड़े आर्थिक संकट से उबर सकें।
रिपोर्ट: अनूप वर्मा
कुदरत का कहर: आधे घंटे के तूफान ने छीना किसानों के निवाले, खेतों में सो गई ‘सोने’ जैसी फसल

06
May