मुंगेली: जिले में जमीन-जायदाद और राजस्व के मामलों को लटकाना अब अधिकारियों को भारी पड़ने वाला है। मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्टोरेट में हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान काम में लापरवाही देख कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही जिले के तीनों एसडीएम (SDM), सभी तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दे दिए।
एक हफ्ते का अल्टीमेटम
कलेक्टर कुंदन कुमार ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो भी मामले समय-सीमा से बाहर हो चुके हैं, उन्हें हर हाल में एक सप्ताह के भीतर निपटाया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में अब किसी भी तरह की कोताही या बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम जनता की परेशानी पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान जब कलेक्टर ने अनुविभागवार नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के मामलों की फाइलों को खंगाला, तो कई केस महीनों से अटके मिले। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजस्व विभाग सीधे तौर पर जनता से जुड़ा है। अगर छोटे-छोटे कामों के लिए नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ें, तो यह प्रशासन की विफलता है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील होकर काम करने की नसीहत दी।
नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि लंबित प्रकरणों की अब हर दिन मॉनिटरिंग होगी। उन्होंने कहा कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। अगर अगले एक हफ्ते में सुधार नहीं दिखा, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अधिकारियों को एक ठोस कार्ययोजना बनाने को भी कहा गया है ताकि भविष्य में फाइलों का अंबार न लगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पांडे तिवारी और अपर कलेक्टर जी.एल. यादव सहित जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। अब देखना होगा कि कलेक्टर की इस सख्ती के बाद तहसील दफ्तरों में कामकाज की रफ्तार कितनी बढ़ती है।