नेशनल हाईवे 30 पर बड़ी वारदात: चारमा में एक ही रात तीन दुकानों के टूटे ताले, लाखों की नगदी समेत सिलेंडर व स्टाम्प पार

चारमा / काँकेर। नगर चारमा के हृदय स्थल से गुजरने वाले नेशनल हाईवे 30 पर चोरों ने एक बार फिर पुलिस की गश्त को चुनौती देते हुए बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि चोरों के एक गिरोह ने हाईवे पर स्थित तीन प्रतिष्ठित दुकानों को अपना निशाना बनाया और नगदी, स्टाम्प व गैस सिलेंडर समेत लाखों के माल पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना के बाद से स्थानीय व्यापारियों और नगरवासियों में भारी दहशत का माहौल है।

मिली जानकारी के अनुसार, चोरी की यह पूरी वारदात रात करीब 2:00 से 3:00 बजे के बीच अंजाम दी गई। चोरों ने सबसे पहले हाईवे पर स्थित गजेंद्र फोटोकॉपी सेंटर का ताला तोड़ा। दुकान के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में तीन संदिग्ध व्यक्ति अंदर घुसकर चोरी की वारदात को अंजाम देते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। चोरों ने यहाँ से लगभग ₹80,000 मूल्य के सरकारी स्टाम्प और गल्ले में रखी नगदी पार कर दी।

इसके बाद इस तिकड़ी ने पास ही स्थित श्रीवास्तव फोटोकॉपी सेंटर को निशाना बनाया और गल्ले में रखे ₹40,000 नगद उड़ा लिए। यहीं पर चोरों का हौसला नहीं रुका; इन दुकानों से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित सुषमा दिनेश होटल का भी ताला तोड़कर चोरों ने गल्ले में रखे ₹65,000 नगद और दो कमर्शियल (व्यवसायिक) गैस सिलेंडर चोरी कर लिए और वारदात को अंजाम देकर रफूचक्कर हो गए।

घटना का खुलासा बुधवार सुबह तब हुआ जब दुकानदार अपने-अपनें प्रतिष्ठान खोलने पहुंचे। दुकानों के ताले टूटे और सामान बिखरा देख उनके होश उड़ गए। पीड़ितों ने तुरंत चारमा थाना पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।

हाईवे जैसी व्यस्त सड़क पर एक साथ तीन दुकानों में चोरी ने पुलिस की रात्रि गश्त (पेट्रोलिंग) व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नेशनल हाईवे पर ही दुकानें सुरक्षित नहीं हैं, तो अंदरूनी इलाकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इसके अलावा, इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल भी खोल दी है। नगर के कई प्रमुख प्रतिष्ठानों में या तो सीसीटीवी कैमरे लगे ही नहीं हैं, और जहाँ लगे हैं, वे सिर्फ ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं यानी बंद पड़े हैं। अगर ये कैमरे चालू होते तो पुलिस को चोरों का सुराग लगाने में बड़ी मदद मिलती। हालांकि, गनीमत रही कि गजेंद्र फोटोकॉपी सेंटर का कैमरा चालू था, जिसमें तीनों चोरों की करतूत कैद हो गई है। पुलिस इसी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है।

इस वारदात ने पुलिस प्रशासन के सामने सबसे बड़ा और गंभीर यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है। हाईवे पर लाइन से कई अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें भी स्थित हैं, लेकिन चोरों ने उन्हें छुआ तक नहीं। चोरों का निशाना बेहद सटीक था—उन्होंने केवल उन्हीं दुकानों के ताले तोड़े जहाँ उस रात बड़ी रकम रखी हुई थी। श्रीवास्तव फोटोकॉपी के संचालक ने अगले ही दिन किसी को भुगतान करने के लिए विशेष रूप से ₹40,000 नगद संजोकर रखे थे, वहीं सुषमा दिनेश होटल के संचालक को भी 1 तारीख का पेमेंट क्लियर करना था, जिसके लिए ₹65,000 गल्ले में मौजूद थे।

बाकी दुकानों को छोड़कर सीधे उन्हीं ठिकानों पर उसी रात धावा बोलना, जब वहाँ सामान्य से अधिक कैश था, साफ इशारा करता है कि इस गिरोह के पास दुकानों के अंदर की ‘सटीक और पुख्ता जानकारी’ पहले से थी। यह महज़ संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश और सटीक रेकी का परिणाम है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि चोर इन गैर-कीमती दिखने वाले सरकारी स्टाम्प पेपर का क्या करेंगे? आशंका जताई जा रही है कि वारदात के पीछे किसी ऐसे ‘इनसाइडर’ (भीतरघाती) या करीबी का हाथ हो सकता है, जिसे इन भुगतानों और पैसों की मौजूदगी की पूरी खबर थी। यह एंगल अब चारमा पुलिस की जांच का सबसे मुख्य और संवेदनशील केंद्र बन गया है।

पिछले कुछ महीनों से चारमा क्षेत्र में चोरी की वारदातें थमी हुई थीं, जिससे नगरवासियों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन इस त्रिकोणीय चोरी ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चारमा पुलिस ने मामला दर्ज कर विभिन्न कोणों से जांच शुरू कर दी है और दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे तीनों संदिग्धों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही चोरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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