Krishna Kamal: नाम कृष्ण कमल, पहचान है कौरव-पांडव

नाम कृष्ण कमल, पहचान है कौरव-पांडव

बाजार तक बना ली पहुंच

राजकुमार मल
भाटापारा:- अद्भुत बनावट, जटिल संरचना और रंगों का अनोखा संयोजन। नाम है कृष्ण कमल। पहचान है, कौरव पांडव के फूल के रूप में। अरसे बाद इसके पौधे फिर से नर्सरियों में नजर आ रहे हैं क्योंकि बाग-बगीचों में इसे शोभाकारी पौधे के रूप में जगह मिलने लगी है।

कृष्ण कमल यानी कौरव पांडव के पौधे नर्सरियों में पहुंचने के बाद इसके फूलों ने फूल बाजार में पहुंच बनानी चालू कर दी है। सीमित आवक, बढ़ सकती है क्योंकि हैरत भरी खरीदी बढ़ते क्रम पर है, लिहाजा नर्सरी और फूल बाजार सामंजस्य बिठाने का जोरदार प्रयास कर रहें हैं।

आने लगे पौधे और फूल

शोभाकारी पौधे और फूलों की अहमियत से कृष्ण कमल को बाग- बगीचों में जैसी जगह मिल रही है, उसे देखते हुए इसके पौधे एवं फूल, नर्सरियों तथा बाजार में नजर आने लगे हैं। घरों में इसलिए पहुंच बना रहे हैं क्योंकि इसका पौराणिक और धार्मिक महत्व है। रही बात कीमत की, तो वह जरूरत और संख्या से तय कर रहा है बाजार।

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बढ़ रहा आयुर्वेदिक उपयोग

कृष्ण कमल यानी कौरव पांडव के फूलों में जो औषधीय गुण मिले हैं, उसके अनुसार तनाव और अनिद्रा जैसी आम हो चली परेशानियां दूर करता है इसका सेवन। दर्द निवारक औषधि बनाने वाली इकाइयां भी खरीदी कर रहीं हैं। पाचन और हृदय विकार भी दूर करते हैं कौरव पांडव के फूल। इसलिए व्यापक पैमाने पर व्यावसायिक खेती भी बढ़ते क्रम पर है।

जानिए कृष्ण कमल को

पैसिफ्लोरेसी परिवार का यह सदस्य तेजी से बढ़ने वाली लताओं वाला पौधा है। उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में बेहतर विकसित होने वाली इस प्रजाति के फूल अपनी अद्भुत बनावट, अनोखा रंग संयोजन और जटिल संरचनाओं के लिए जाने जाते हैं। पांच पंखुड़ियां पांच पांडव को प्रतिबिंबित करती हैं, तो हरा आधार कौरवों को रेखांकित करता है। इसलिए इसे कौरव पांडव फूल के नाम से पहचाना जाता है।

पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

कृष्ण कमल अपनी आकर्षक सुंदरता और बहुपयोगी गुणों के कारण एक महत्वपूर्ण पौधा है। यह न केवल आध्यात्मिक रूप से पूजनीय है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यदि लोग इसे अपने बगीचों में लगाते हैं, तो वे इसकी सुंदरता का आनंद लेने के साथ-साथ इसके औषधीय गुणों से भी लाभान्वित हो सकते हैं।

-अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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