भीषण गर्मी में बेजुबानों के लिए मसीहा बने ग्रामीण: जंगल से लगे तालाब में निजी बोर से पहुँचाया पानी, शिकार और आग लगाने पर लगाया प्रतिबंध

जनधारा न्यूज, चरामा।रिपोर्ट: अनूप वर्माचरामा: छत्तीसगढ़ में नौतपा और भीषण गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर है। पारा लगातार बढ़ने के कारण जहाँ आम जनजीवन बेहाल है, वहीं जंगलों में प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाने से मूक वन्यजीव और पशु-पक्षी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

शासन-प्रशासन की मुस्तैदी के दावों के बीच, चरामा ब्लॉक के जंगल से सटे ग्राम अरौद से इंसानियत और पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहाँ पानी की किल्लत से जूझते बेजुबान प्राणियों की जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने खुद आगे आकर एक सराहनीय पहल की है।सूख चुके ‘जोगी तालाब’ में निजी बोर से भरा पानीग्राम अरौद का ‘जोगी तालाब’ सीधे घने जंगल की सीमा से लगा हुआ है। इस पूरे इलाके में दूर-दूर तक पानी की कोई दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीव प्यास बुझाने इसी तालाब पर निर्भर रहते हैं।

भीषण गर्मी के कारण यह तालाब पूरी तरह सूखने की कगार पर था, जिससे बेजुबान पशु-पक्षी पानी के लिए तड़प रहे थे।इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जनपद सदस्य चिंताराम साहू और सरपंच रूपेश मरकाम के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एक आपात बैठक की। प्रशासनिक मदद का इंतजार किए बिना, ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से निजी बोरवेल से पाइप लाइन जोड़कर सीधे जोगी तालाब में पानी की सप्लाई शुरू कर दी। तालाब में दोबारा पानी भरता देख इलाके के पशु-पक्षियों ने राहत की सांस ली है और अब वे अपनी प्यास बुझा पा रहे हैं।

इस पुनीत कार्य में कन्हैया साहू, भोज साहू, नंदकिशोर, बल्लू साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा।”जब शासन-प्रशासन के इंतजाम कम पड़ गए, तब ग्रामीणों ने अपनी जिम्मेदारी समझी। बेजुबानों की प्यास बुझाना ही सबसे बड़ा धर्म है।”— ग्रामीण, ग्राम अरौददिन में भी दिखते हैं भालू और तेंदुए, शिकार पर पूरी तरह रोकयह क्षेत्र जैव विविधता के मामले में बेहद संवेदनशील है। जंगल से लगा होने के कारण इस इलाके में दिन के समय भी भालू, तेंदुआ और जंगली मुर्गे जैसे वन्यजीव आसानी से तालाब के आस-पास घूमते हुए देखे जाते हैं। पानी की तलाश में ये जानवर लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अरौद के ग्रामीणों ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से जंगल में किसी भी पशु-पक्षी का शिकार करने और सूखी पत्तियों में आग लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया है।नियम तोड़ने पर भुगतना होगा कड़ा दंडगाँव की समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाते या जंगल में आग लगाते हुए पाया गया, तो उस पर ग्रामीण स्तर पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके साथ ही आरोपी को तुरंत वन विभाग के सुपुर्द कर कानूनी व उचित दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाएगी।ग्रामीणों की इस आत्मनिर्भर और संवेदनशील पहल की पूरे वनांचल क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। अरौद के ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले, तो बिना सरकारी इमदाद के भी पर्यावरण और बेजुबान जीवों की रक्षा की जा सकती है।

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