छत्तीसगढ़ में ‘कोनोकार्पस’ के रोपण पर तत्काल रोक: जानिए क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला

रायपुर | 09 जुलाई 2026

Chhattisgarh Conocarpus Ban : छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने ‘कोनोकार्पस इरेक्टस’ (Conocarpus Erectus) प्रजाति के नए पौधों को लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अब राज्य की सीमा के भीतर कोई भी सरकारी विभाग, आम नागरिक या निजी संस्था इस पौधे का रोपण नहीं कर सकेगी।

छत्तीसगढ़ से पहले गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य भी इस विदेशी पौधे पर रोक लगा चुके हैं।

प्रतिबंध के पीछे सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय समिति की रिपोर्ट
यह फैसला किसी अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर लिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों के बाद गठित केंद्रीय सशक्त समिति ने 21 अगस्त 2025 को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में ‘कोनोकार्पस इरेक्टस’ को एक बेहद आक्रामक (Invasive) वनस्पति माना गया, जो स्थानीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रही है।

क्यों खतरनाक है कोनोकार्पस? (प्रतिबंध की 4 मुख्य वजहें)
पिछले कुछ सालों में पार्कों, सड़कों के किनारे और कॉलोनियों को सुंदर व हरा-भरा दिखाने के लिए इस पौधे का खूब इस्तेमाल हुआ, लेकिन इसके छिपे हुए नुकसान अब सामने आए हैं:

देशी वनस्पतियों के लिए खतरा: यह पौधा इतनी तेजी से फैलता है कि आसपास उगने वाले हमारे स्थानीय और देशी पेड़-पौधों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है।

भूजल स्तर में गिरावट: इसकी जड़ें और इसके बढ़ने की रफ्तार जमीन के नीचे मौजूद जल स्रोतों (Groundwater) पर बेहद बुरा असर डालती हैं।

गंभीर बीमारियाँ: इस पौधे के परागकण (Pollen grains) और इसकी पत्तियों से निकलने वाले केमिकल हवा में घुलकर इंसानों में अस्थमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं।

पारिस्थितिक तंत्र का असंतुलन: स्थानीय जीव-जंतुओं और पक्षियों के अनुकूल न होने के कारण यह पूरे इकोसिस्टम को बिगाड़ रहा है।

अब क्या बदलेगा?
इस नई अधिसूचना के जारी होने के बाद अब छत्तीसगढ़ में सिर्फ उन्हीं पेड़-पौधों के रोपण को बढ़ावा दिया जाएगा, जो यहाँ की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हैं। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य भविष्य की वृक्षारोपण योजनाओं में ‘देशी प्रजातियों’ को प्राथमिकता देना है, ताकि पर्यावरण के साथ-साथ लोगों की सेहत भी सुरक्षित रह सके।

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