नई दिल्ली। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एम्स के ‘डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल डिसीप्लाइंस’ ने महज 13 महीने के भीतर 1000 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। यह किसी भी भारतीय सरकारी अस्पताल द्वारा सबसे कम समय में इतनी बड़ी संख्या में रोबोटिक सर्जरी करने का पहला मामला है।
सरकारी क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक का नया युग
आमतौर पर रोबोटिक सर्जरी काफी महंगी मानी जाती है और अब तक इसका प्रमुख केंद्र निजी अस्पताल ही रहे हैं। हालांकि, एम्स दिल्ली ने इस धारणा को बदलते हुए सामान्य सर्जरी में रोबोटिक तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है। इस तकनीक के माध्यम से पित्त की थैली, हर्निया और पथरी जैसी आम समस्याओं से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक का इलाज बेहद सटीकता के साथ किया जा रहा है।
जटिल ऑपरेशनों में मिली बड़ी मदद
एम्स के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुम्बर ने जानकारी दी कि रोबोटिक तकनीक का उपयोग पैंक्रियाटिक डुओडेनक्टॉमी, जीआई कैंसर, हेपेटो-बिलियरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे जटिल ऑपरेशनों में किया जा रहा है। रोबोटिक सिस्टम की मदद से डॉक्टरों को ‘थ्री-डायमेंशनल’ (3D) विजन मिलता है, जिससे शरीर के संवेदनशील हिस्सों में सर्जरी करना आसान हो जाता है। इससे मरीजों को कम दर्द होता है और वे जल्दी रिकवर होते हैं।
भविष्य के सर्जनों को तैयार कर रहा है एम्स
संस्थान का उद्देश्य केवल आधुनिक इलाज देना ही नहीं, बल्कि इस तकनीक को भविष्य के लिए तैयार करना भी है। एम्स में बड़े पैमाने पर रेजिडेंट डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी की ट्रेनिंग दी जा रही है। एम्स की यह पहल देश के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए एक प्रेरणा बनेगी, जिससे आने वाले समय में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं आम जनता तक अधिक आसानी से पहुँच सकेंगी।