सरायपाली से सारंगढ़ के बीच अनेक फलदार वृक्ष 0
दिलीप गुप्ता
सरायपाली : प्रकृति हमें निस्वार्थ व बिना भेदभाव के सभी मानव जाति को रहने के लिए लकड़ी , खाने के लिए फल फ्रूट व कंद मूल , जीवन के लिए ऑक्सीजन , मृत्यु में लकड़ी इस यह मानव जीवन के रोजमर्रा की प्रत्येक आवश्यक वस्तुएं मिलती है ।
सरायपाली से सारंगढ़ मार्ग पर गोमर्डा जंगल क्षेत्र के ग्राम भूमखोलिया ग्राम में चार व केंदू के बहुत वृक्ष हैं । वर्तमान में इन झाड़ों में काफी संख्या में उक्त फल फले हैं इन झाड़ों के आसपास व नीचे से गुजरने वाले राहगीरों को ये फल अपनी ओर आकर्षित करते हैं फलों से पड़े डालियों को देखकर न चाहते हुवे भी राहगीरों को रुकना पड़ता है व कुछ देर रुकने के बाद रसीले व स्वादिष्ट चार व केंदू खाए बिना मन नहीं भरता । अनेक लोग तो घर के लिए थोड़ा बहुत ले जाते हैं । ग्रामीण जन खाने व घर ले जाने के लिए इनकार नहीं करते बल्कि खुश होकर स्वयं तोड़कर राहगीरों को भेंट कर सहयोग करते हैं

इस संबंध में वहां से गुजर रहे राजू किर्ती चौहान एवं पत्रकार धीरज बरेठ ने बताया कि गाँव के वातावरण में बच्चों के साथ जंगल में चार (चारा/केंदु) खाते हुए मन सच में गदगद हो उठता है। प्रकृति की गोद में बिताए ऐसे पल जीवन की असली खुशी का एहसास कराते हैं—न कोई भागदौड़, न कोई दिखावा, बस सादगी और अपनापन।
बच्चों की हंसी, पेड़ों की छांव, और मिट्टी की खुशबू मिलकर एक ऐसा सुकून देती है, जो शहरों की भीड़ में कहीं खो जाता है। ऐसे अनुभव न सिर्फ यादगार होते हैं, बल्कि हमें हमारी जड़ों व ग्रामीण संस्कृति से भी जोड़ते हैं । ग्रामीण बच्चे स्वयं झाड़ू से उक्त फल तोड़कर राहगीरों को खाने के लिए दिए जाने पर बच्चे कहते है कि इससे हमें खुशी व आत्मिक संतुष्टि भी मिलती है । निश्चित रूप से ग्रामीणों व बच्चों का यह सकारात्मक कदम एक अच्छा संदेश देता है ।