चरामा में एनएच-30 की उल्टी नाली का दंश: इंजीनियरों की लापरवाही की सज़ा भुगत रहे हैं आम जनता और किसान

चारामा। नगर पंचायत चरामा में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) के चौड़ीकरण को हुए लगभग 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन हाईवे विभाग के इंजीनियरों की एक बड़ी लापरवाही का खामियाजा आज पूरा चरामा नगर और यहाँ का स्थानीय गरीब सोनकर समाज भुगत रहा है। चौड़ीकरण के समय बिना सोचे-समझे बनाई गई ‘उल्टी नाली’ अब आम जनता और किसानों के लिए गले की हड्डी बन चुकी है।

नियम के मुताबिक नाली का ढलान शहर के बाहर होना चाहिए, लेकिन चरामा में इंजीनियरों ने इसका पूरा ढलान शहर के बीचों-बीच यानी देना बैंक और अश्वनी किराना स्टोर्स के पास लाकर छोड़ दिया। नतीजा यह है कि बारिश का पानी तो दूर, आम दिनों में भी पूरे नगर का गंदा पानी इसी एक जगह पर आकर जमा हो जाता है। अब इस प्रशासनिक गलती को छुपाने के लिए नगर पंचायत और हाईवे विभाग मिलकर गरीब किसानों की पैतृक भूमि को बलि का बकरा बनाने पर उतारू हैं।

एनएच विभाग की घोर लापरवाही: साल में एक बार भी नहीं होती सफाई
हाईवे विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि विभाग साल में एक बार भी इस मुख्य नाली की सफाई कराने की ज़हमत नहीं उठाता। स्थिति यह है कि अब बारिश का सीज़न भी लग चुका है, लेकिन इसके बावजूद नाली की सफाई नहीं की गई है। पूरी नाली में इस वक्त भारी मात्रा में मलबा और कचरा भरा हुआ है। नाली पूरी तरह मलबे से पटी पड़ी है, जिससे आने वाले दिनों में ज़रा सी बारिश होते ही पानी पूरी तरह ओवरफ्लो हो जाएगा और लोगों के घरों में तबाही मचना तय है।

प्रशासनिक दबाव का शिकार हुआ सोनकर समाज
सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार, नगर पंचायत चरामा के मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा वार्ड क्रमांक 14 निवासी सोहन सोनकर (पिता स्व. तिहारू राम सोनकर) को लगातार नोटिस थमाए जा रहे हैं। पहले प्रशासन ने अश्वनी किराना स्टोर्स के पास हाईवे की नाली का पानी मत्स्य विभाग के तालाब की ओर ले जाने के लिए अस्थाई सहमति मांगी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद प्रशासन ने रुख बदलते हुए दंडात्मक नोटिस जारी कर दिया और 3 दिनों के भीतर मिट्टी न हटाने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दे डाली।

स्थानीय स्तर पर कई बार सोनकर समाज के द्वारा अपनी उपजाऊ ज़मीन को बचाने और नाली को बंद करने के लिए कड़ा विरोध और धरना-प्रदर्शन भी किया गया। लेकिन हर बार भारी प्रशासनिक दबाव के चलते गरीब किसानों को बेबस होकर आखिरकार नाली को खोलना पड़ा। इस कार्रवाई पर सोनकर समाज के पीड़ित किसानों ने तहसीलदार और मुख्य नगरपालिका अधिकारी के समक्ष दस्तावेज़ों के साथ अपना कड़ा लिखित जवाब पेश किया है। किसानों ने साफ कहा है कि:

जिस स्थान पर नगर पंचायत जबरन नाली का पानी मोड़ना चाहती है, वह उनकी निजी स्वामित्व वाली लगानी कृषि भूमि है (खसरा नं. 1092, रकबा 0.16 हेक्टेयर)।

हाईवे के किनारे मिट्टी डालने का इल्ज़ाम पूरी तरह से गलत और द्वेषपूर्ण है।

यह ज़मीन पीड़ित परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है, लेकिन पूरे शहर का गंदा पानी यहाँ छोड़कर इसे दलदल बनाया जा रहा है।

10 सालों की लड़ाई, साल 2024 में विधायक ने दी थी चेतावनी
सोनकर परिवार के लगभग 35 से 40 लोग (जिनमें अमर सिंह, बिष्णु राम, गोपी राम, लोकेश, सोहनलाल, बालाराम आदि शामिल हैं) इस ज़मीन पर आश्रित हैं। इस शोषित परिवार ने वर्ष 2016, 2022 और 2023 को लगातार आवेदन देकर गुहार लगाई थी कि नेशनल हाईवे के पानी को सीधे आगे ले जाकर नदिया या नाले में मिलाया जाए। लेकिन शहर के कुछ रसूखदार लोगों को बचाने के चक्कर में पानी को सीधे आगे बढ़ाने के बजाय गरीब किसानों के खेतों की तरफ मोड़ दिया गया। इस मांग को वार्ड के निर्वाचित पार्षदों ने भी लिखित में समर्थन दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साल 2024 में क्षेत्रीय विधायक ने भी इस स्थल का दौरा कर शहर का बारीकी से निरीक्षण किया था। विधायक ने एनएच विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़े स्तर पर वृहद आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। विधायक की चेतावनी के बाद एनएच विभाग ने आनन-फानन में तत्काल छोटा-मोटा काम करके मामले को शांत कर दिया, लेकिन उसके बाद फिर सब कुछ भूल गया। हर साल जब बारिश आती है, पानी ओवरफ्लो होता है और नगरवासी चिल्लाते हैं, तो एनएच विभाग लीपापोती करके अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, पर इस समस्या का कोई ठोस और स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

भविष्य में स्थिति होगी बेहद विकराल
नागरिकों का कहना है कि आज तो सिर्फ कुछ हिस्सों में पानी भर रहा है, लेकिन आने वाले 5 से 7 सालों में यह स्थिति बेहद विकराल रूप ले लेगी। जैसे-जैसे चरामा शहर का विस्तार होगा, आबादी बढ़ेगी, वैसे-वैसे पूरे शहर की नालियों का पानी इसी मुख्य नाली में आएगा। ढलान शहर के बीचों-बीच होने के कारण भविष्य में यह नाली हमेशा ओवरफ्लो रहेगी, जिससे पूरा हाईवे और चरामा शहर गंदे पानी व मलबे में डूब जाएगा।

क्या बोले नगर पंचायत सीएमओ?
“यह पूरा काम हाईवे विभाग का है। फिलहाल, बारिश के मद्देनज़र नागरिकों को राहत देने के लिए मेरे द्वारा हाईवे विभाग के संबंधित अधिकारी को फोन किया गया है, ताकि नाली की जल्द से जल्द साफ-सफाई कराई जा सके।”
— हेमंत कुमार निताम, सीएमओ, नगर पंचायत चरामा

प्रशासन की इस दोहरी नीति के खिलाफ अब सोनकर समाज और चरामा की जनता एकजुट हो चुकी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन भविष्य के इस बड़े खतरे को देखते हुए अपनी तकनीकी गलती को सुधारकर पानी को नदी में गिराने की स्थाई व्यवस्था करता है, या फिर चरामा की जनता को आर-पार की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

जनधारा संवाददाता, अनूप वर्मा (चरामा)

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