छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिर दिखी गुटबाजी, टीएस बाबा और भूपेश बघेल समर्थकों में छिड़ा व्हाट्सएप युद्ध, भाजपा ने साधा निशाना…

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। अंबिकापुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। सरगुजा महाराज से जुड़े कांग्रेस के एक व्हाट्सएप ग्रुप की चर्चाएं इन दिनों वायरल हो रही हैं, जिनमें पार्टी के भीतर टी एस सिंहदेव और भूपेश बघेल समर्थकों के बीच साफ विभाजन दिखाई दे रहा है।

वायरल चैट्स में दावा किया जा रहा है कि यह ग्रुप “सरगुजा महाराज टीएस बाबा का है, भूपेश बघेल का नहीं।” ग्रुप में यहां तक लिखा गया कि बघेल विचारधारा से जुड़े सदस्य स्वयं ग्रुप छोड़ दें, अन्यथा उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। आरोप है कि हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अंबिकापुर दौरे के दौरान उनके स्वागत में शामिल हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस ग्रुप से रिमूव कर दिया गया। बताया जा रहा है कि करीब एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं को ग्रुप से बाहर किया गया है। ग्रुप में यह संदेश भी सामने आया कि “जो बाबा का नहीं, वह किसी का नहीं।”

दरअसल, भूपेश बघेल के अंबिकापुर दौरे के दौरान टी एस सिंहदेव के समर्थन में कोई खास मौजूदगी नहीं दिखी थी, जिसके बाद यह अंदरूनी खींचतान और तेज हो गई। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस लगातार चुनावी हार से जूझ रही है। बीते एक साल में पार्टी को चौथी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।

हार के बाद टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर नाराजगी अब खुलकर सोशल मीडिया पर दिखने लगी है। कुछ कार्यकर्ता आरएसएस की कार्यशैली की तारीफ करते नजर आ रहे हैं, तो वहीं पार्टी के बड़े नेताओं से इस्तीफे तक की मांग की जा रही है। कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह अब पार्टी की मुश्किलें और बढ़ाती दिख रही है।

इस पूरे मामले पर भाजपा ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। विधायक पुरंदर मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के विभाजन के साफ संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक तरफ टी एस बाबा हैं, दूसरी तरफ भूपेश बघेल और तीसरी तरफ चरण दास महंत। कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है। ये कब क्या बोल दें, कोई ठिकाना नहीं है। अभी तो तीन साल बाकी हैं, आगे और क्या-क्या देखने को मिलेगा, कहा नहीं जा सकता।”

वहीं, इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए टी एस सिंहदेव ने अपेक्षाकृत संयमित बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे विचारों के आदान-प्रदान का स्वागत करते हैं। सिंहदेव ने कहा, “स्वच्छ विचारों का हमेशा स्वागत होना चाहिए, भले ही मतभेद क्यों न हों।”

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी का यह मामला न सिर्फ पार्टी की अंदरूनी कमजोरी उजागर कर रहा है, बल्कि लगातार मिल रही चुनावी हार के बाद बढ़ती बौखलाहट को भी सामने ला रहा है। दूसरी ओर, भाजपा इस मौके को भुनाने में जुट गई है और कांग्रेस की आपसी कलह को जनता के बीच जोर-शोर से उठा रही है।

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