रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे अंडो के दाम, चिकन भी हुआ लाल

अगर आप भी संडे हो या मंडे, रोज खाएं अंडे वाले फॉर्मूले पर चलते हैं, तो जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। देश भर के खुदरा बाजारों में अंडे और चिकन की कीमतों ने रफ्तार पकड़ ली है। कई शहरों में एक अंडा 8.5 से 9 रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहा है, वहीं चिकन का भाव भी 250 से 260 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुका है। दरअसल, मुर्गियों को खिलाया जाने वाला चारा (पोल्ट्री फीड) भारी मात्रा में महंगा हो गया है, जिसने सीधे तौर पर आपके ब्रेकफास्ट और डिनर का बजट बिगाड़ दिया है।

मक्का और सोयाबीन ने कैसे बिगाड़ा खेल?
पोल्ट्री कंपनियों के मुताबिक, मार्च के बाद से मुर्गियों के दाने में इस्तेमाल होने वाली हर जरूरी चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के अनुसार, महज एक साल में अंडों की थोक कीमतों में लगभग 40% का उछाल आया है। इसके पीछे मुख्य वजहें यह हैं:

एथेनॉल कंपनियों से कॉम्पिटिशन: मुर्गियों के चारे में 55% हिस्सा मक्के का होता है। अब एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां भी भारी मात्रा में मक्का खरीद रही हैं, जिससे मक्का मार्च के बाद से 35% से ज्यादा महंगा हो गया है।

सोयाबीन की शॉर्टेज: चारे में 22% इस्तेमाल होने वाली सोयाबीन खली की कीमत में 64% से ज्यादा की तेजी आई है। पिछले साल देश में सोयाबीन का उत्पादन करीब 20% कम रहा था।

दवाइयों के दाम 3.5 गुना बढ़े: विदेशों से आने वाले जरूरी एमीनो एसिड की कीमत मार्च से अब तक साढ़े तीन गुना बढ़ चुकी है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

भीषण गर्मी और मौसम की मार
इस साल जून तक पड़ी रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने ब्रॉयलर चिकन के उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाया। ज्यादा तापमान के कारण मुर्गियों की मृत्यु दर बढ़ गई, जिससे बाजार में चिकन की सप्लाई कम हो गई और दाम 260 रुपये किलो तक जा पहुंचे। इसके साथ ही इस साल के अनियमित मानसून ने भी पोल्ट्री उद्योग की चिंता बढ़ा दी है, जिससे आने वाली फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

सावन में मिल सकती है थोड़ी राहत
पोल्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि जुलाई के आखिरी हफ्ते से कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। उत्तर भारत में सावन का महीना शुरू होने जा रहा है, जिस दौरान एक बड़ा वर्ग धार्मिक कारणों से अंडा और मांस खाने से परहेज करता है। मांग (Demand) घटने की वजह से कीमतों में कुछ नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, अगर मानसून का रुख खराब रहा और चारे के दाम कम नहीं हुए, तो सावन के बाद कीमतें दोबारा आम आदमी को झटका दे सकती हैं।

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