नई दिल्ली में सोने और चांदी के खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। पिछले 40 दिनों के भीतर 24 कैरेट सोना 11700 रुपए प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। वहीं चांदी की कीमत में भी प्रति किलोग्राम 42000 रुपए तक की बड़ी कमी आई है। बाजार के जानकारों के मुताबिक यह नरमी सरकार द्वारा विदेशों से आने वाले सोने को कम करने के प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रही बिकवाली के कारण आई है।

प्रधानमंत्री ने की थी खर्च टालने की अपील
बीती 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से गैर-जरूरी खर्चों को कुछ समय के लिए टालने की बात कही थी। उन्होंने देशवासियों को सलाह दी थी कि वे एक साल तक सोना खरीदने और विदेश घूमने की योजनाओं को टाल दें। प्रधानमंत्री का मानना था कि ऐसा करने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिलेगी। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना दूसरे देशों से खरीदता है, जिसे आयात करना कहते हैं। ज्यादा सोना खरीदने से देश का पैसा बाहर चला जाता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता है।
जानिए 40 दिन में कितने बदल गए दाम
प्रधानमंत्री की अपील के समय यानी 10 मई को 24 कैरेट सोने का भाव 153140 रुपए प्रति 10 ग्राम था और चांदी 262350 रुपए प्रति किलोग्राम पर बिक रही थी। इसके बाद 29 जून तक सोने की कीमत घटकर 141421 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस तरह सोना 11719 रुपए सस्ता हो गया। इसी तरह चांदी की कीमत भी घटकर 216541 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई, जो कि करीब 42370 रुपए की बड़ी गिरावट है।
सरकार ने टैक्स बढ़ाकर कसी नकेल
प्रधानमंत्री की इस अपील के कुछ दिनों बाद सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। सरकार ने बाहर से आने वाले सोने और चांदी पर लगने वाले टैक्स यानी आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधा 15 फीसदी कर दिया। इसमें सीमा शुल्क और कृषि बुनियादी ढांचा विकास टैक्स शामिल है। आसान भाषा में कहें तो सरकार ने विदेशों से सोना मंगाना महंगा कर दिया है।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना
बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो कीमत देखकर खरीदारी करते हैं। इससे आने वाले समय में सोने की मांग और इसके आयात में 10 से 15 फीसदी तक की कमी आ सकती है। हालांकि सरकार के इस फैसले का सीधा मकसद कीमतें घटाना नहीं था, बल्कि देश से बाहर जाने वाले धन को रोकना और विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करना था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में थोड़ा और बदलाव देखने को मिल सकता है।