0 साजिश के तहत कलेक्टर को भ्रमित तो नहीं किया गया 0
0कार्यवाही के दौरान महिला एसडीएम को घेरने वालो पर कार्यवाही किए जाने की कोई जानकारी नहीं 0
दिलीप गुप्ता
सरायपाली= चिवराकुटा के वनभूमि में स्थानीय गैस एजेंसी के संचालक द्वारा 6 गैस कैप्सूल वाहन से नोजल लगाकर गैस चोरी किए जाने का मामला अब सिंघोड़ा थाने क्षेत्र से निकलकर महासमुंद जिला तक इसके तार पहुंच गया है । “आपदा में अवसर” तलाशते अधिकारियों ने जबरदस्त खेल कर साजिश रचते हुवे 1.5 करोड़ से अधिक के गैस की अवैधानिक तरीके से चोरी करते हुवे उसे बेच दिया गया । अंदर ही अंदर ऐसी साजिश जिला खाद्य अधिकारी द्वारा रची गई कि किसी भी अन्य अधिकारियों , विभाग व पुलिस तक को इसकी खबर नहीं लगी । सभी कुछ होटल में बैठकर साजिश रची गई तो वहीं कार्यालय में बैठकर फर्जी व कुटरचित दस्तावेज तैयार किए गए । एक जिला स्तर के अधिकारी द्वारा प्रभावशाली पद में रहते हुवे इस तरह का कृत्य किया जाना सरकार ,विभाग व जिला के लिए बहुत ही निंदनीय व शर्मिंदगी पूर्ण है । ऐसा पद जहां बिना मेहनत के ही घर बैठे महीना पहुंचता है उसके बावजूद पैसों की भूख ने इस प्रभावशाली पद व विभाग की गरिमा को कलंकित तो किया ही है साथ ही सरकार के जीरो टार्लेन्स की भावना को भी आहत किया है ।

सवाल यहां यह उठ रहा है कि क्या इन एलपीजी गैस कैप्सूल की सुरक्षा का हवाला देकर कहीं महासमुंद कलेक्टर को भ्रमित कर यह साजिश जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव द्वारा तो नहीं रची गई ? इसकी भी जांच कलेक्टर को करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह कोई अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने उच्च अधिकारियों को भ्रमित जानकारी देकर इस तरह का घृणित कृत्य न कर सके ।
घटना की “आपदा से अवसर” की शुरुवात होती है सिंघोड़ा थाना के वनांचल ग्राम चिवराकुटा स्थित इंडेन गैस एजेंसी के गैस चोरी किए जाने से । स्थानीय गैस संचालक प्रकाश गुप्ता को कंपनी व प्रशासन द्वारा सीमा व सुदूर बसे ग्रामीणों को गैस की सुविधा प्रदान करना । गैस संचालक के पिता मोहन गुप्ता को कुछ वर्षों पूर्व वन विभाग के वन भूमि पर बकरी पालन करने हेतु जमीन आवंटित की गई । पर कहा जाता है कि यह सुनसान स्थान में जमीन लेने का बहाना था वहां किसी भी प्रकार का कोई कार्य जिस उद्देश्य को लेकर जमीन आबंटित की गई थी वह नहीं किया जाता था । वहीं निर्धारित जमीन से कई गुना अधिक जमीन भी कब्जा किए जाने की चर्चा होती रहती है । गैस एजेंसी की आड़ में संचालक द्वारा इसी जमीन को गोदाम नुमा रूप देकर विगत कई महीनों से एलपीजी गैस कैप्सूलो से नोजल मशीन के मार्फत गैस की चोरी की जाती थी किंतु रंगेहाथों कभी पकड़ा नहीं जा सका । सौभाग्य से विगत 23 दिसंबर 2025 को सरायपाली एसडीएम अनुपमा आनंद धान तस्करी को रोकने चिवराकुटा के पास गश्त कर रही थी उसी समय जंगल रास्ते से गैस कैप्सूलो को जाते दिखाई दिए जाने पर शंका के तहत जांच की गई

तो उक्त वनभूमि के अंदर 6 गैस कैप्सूल से मशीन के माध्यम से सिलेंडरों में गैस भरा जा रहा था । तत्काल सहायक खाद्य अधिकारी व खाद्य निरीक्षक को बुलाकर उनकी जप्ती प्रकरण दर्ज कराया गया व कैप्सूल को सुरक्षा के दृष्टिकोण को देखते हुवे सिंघोड़ा थाने में जमा कराया गया । इस बीच छापेमारी के दौरान कुछ लैठतों द्वारा लाठी के साथ एसडीएम की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया गया था किंतु पुलिस को देखते ही सभी लठैत वहां से फरार हो गए । एसडीएम के साथ कुछ अनहोनी होने से वे बच गई । पुलिस को इन लठैतो की भी जानकारी लेकर इन पर जांच कर कार्यवाही की जानी चाहिए थी किंतु इस तरह कार्यवाही की कोई जानकारी अभी सामने नहीं आई है । निश्चित रूप से यह किसके शह पर किया गया होगा यह सर्वविदित है । इस प्रकरण में इंडेन गैस संचालक प्रकाश गुप्ता के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था ।
कार्यवाही के बाद लगभग 3 माह तक उक्त गैस कैप्सूल सिंघोडा थाने में सीसीटीवी व गार्डों के निगरानी में सुरक्षित थी । इस बीच लगभग 1.5 करोड़ गैस जिला खाद्य अधिकारी के नजरों में खटकने लगा व “आपदा में अवसर” तलाशने लगे कि किस तरह इसका फायदा उठाया जाए व करोड़ों रुपए के गैस पर हांथ साफ किया जाए । इसी के तहत खाद्य अधिकारी अजय यादव द्वारा साजिश रची गई । संभवतः इसी साजिश के तहत उन्होंने कलेक्टर को इस ज्वलनशील गैस की सुरक्षा व कोई गड़बड़ी न हो इसका हवाला देकर इसे पुलिस सुरक्षा से हटाकर कहीं गैस प्लांट में रखे जाने का सुझाव दिया गया होगा जिसे कलेक्टर द्वारा सही सुझाव को ध्यान में रखते हुवे सिंघोडा थाने को आदेशित कर खाद्य विभाग के अधिकारियों को सुपुर्दनामे में दिए जाने के आदेश के बाद सिंघोड़ा पुलिस द्वारा जिस तरह उन्हें स्थानीय खाद्य अधिकारी द्वारा दिया गया था उसी स्थिति में उन्हें दे दिया गया । स्थानीय अधिकारियों द्वारा अपने जिला अधिकारी के आदेश व निर्देश के तहत उन्होंने सुपुर्दनामे में लेते समय 200 किलोमीटर दूर अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड में जमा किए जाने के दौरान कहीं भी इसकी तौलाई नहीं की गई । गैस की तौलाई नहीं किया जाना भी एक साजिश के तहत था । सरायपाली के अधिकारियों को यह आभास भी नहीं रहा होगा कि उनकी आड़ में उनके उच्च अधिकारी द्वारा इतनी बड़ी साजिश रची जा रही है ।उक्त गैस प्लांट में जाने के बाद गैस चोरी को अंजाम दिया गया । इस दौरान जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव द्वारा रायपुर के गैस चूल्हा व्यवसायी मनीष चौधरी व महासमुंद स्थित गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर द्वारा पैसों की डील कर सुनियोजित तरीके से प्लांट के मालिक संतोष सिंग ठाकुर डायरेक्टर व पुत्र सार्थक ठाकुर तथा मैनेजर निखिल वैष्णव द्वारा सामूहिक रूप से मिलकर रायपुर के अन्य 8 व्यवसायियों को पूरी गैस बेचने की बात जांच में आई । इतना सब कुछ हो गया पैसों का बटवारा भी हो गया पर इसकी कोई शंका या भनक बाहर नहीं निकल सकी ।
यह मामला दब जाता व रफा दफा हो जाता यदि कैप्सूल वाहन मालिक द्वारा अपने वाहन को वापस लेने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई होती । न्यायालय के आदेश के बाद वाहन मालिक को अपनी वाहन वापस लेने में जिस तरह जिला खाद्य अधिकारी द्वारा घुमाया गया व भ्रमित किया गया उससे कुछ शंकाएं उत्पन्न हुई । जब वाहन मालिक द्वारा ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट कैप्सूल लेने गए तो वहां उन्हें खाली टैंकर दिया जा रहा था जिसे सुपुर्दनामे में लेने से मालिक ने इनकार कर दिया गया । इसकी शिकायत वाहन मालिक के अधिकार पत्र धारी भूपेंद्र कुमार साहू द्वारा 23/4/2026 को कलेक्टर को विस्तृत जानकारी के साथ पत्र लिखते हुवे उसके 3 कैप्सूल में रखे कुल 42930 किलोग्राम गैस जिला खाद्य अधिकारी व ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चोरी किए जाने व उसे वापस दिलाए जाने हेतु आवेदन दिया गया ।पत्र में लिखा गया कि सिंघोड़ा थाने में खड़ी गैस कैप्सूल को सिंघोड़ा थाना द्वारा बगैर गैस के वापस दिया जा रहा है । इसकी सूचना जब सिंघोड़ा थाने को मिली तो पुलिस को इस पर विश्वास ही नहीं हुआ व तत्काल इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार को दी गई । उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुवे तत्काल जांच प्रारंभ की व तब तक मीडिया में पुलिस द्वारा गैस चोरी के आरोप लगने प्रारंभ हो गए थे जिससे पुलिस की छवि खराब हो रही थी । ((हालाकि इस संबंध में विगत 27/4/26 को ही आज की जनधारा द्वारा इस मामले में सिंघोड़ा पुलिस की किसी भी तरह की भूमिका व संलिप्तता नहीं होने व जिला खाद्य विभाग व ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड की इस प्रकरण में भूमिका व संलिप्तता होने की आशंकाओं से संबंधित समाचार का प्रकाशन किया गया था जो पुलिस जांच में सही पाया गया ।)) पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार द्वारा एक टीम गठित कर प्रारंभिक जांच में प्रकरणों से संबंधित दस्तावेजों , वैज्ञानिक व इलेक्ट्रॉनिक गवाहों, व इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वाहनों में लगी जीपीएस सिस्टम ने निभाई जिससे पुलिस को काफी मदद मिली जांच के आधार पर पहले प्लांट के मालिक संतोष सिंग ठाकुर, उनके पुत्र व डायरेक्टर सार्थक ठाकुर व मैनेजर निखिल वैष्णव के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया गया व मैनेजर निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर पूछताछ किए जाने के बाद जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, महासमुंद गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर व रायपुर के गैस चूल्हा व्यवसायी मनीष चौधरी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए जाने के बाद 8 मई को देर रात तीनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया । इस प्रकरण में अभी भी ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड के मालिक संतोष सिंग ठाकुर व डायरेक्टर सार्थक फरार हैं । पुलिस का दावा है कि दोनों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा ।
इस गैस चोरी प्रकरण में अभी तक 6 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुवे 4आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है । अभी भी इस प्रकरण की जांच जारी है संभव है आने वाले समय में जांच में और नाम सामने आयेंगे व उन पर भी कानूनी कार्यवाही होगी ।