सक्ती जिले में हुए भीषण वेदांता पावर प्लांट हादसे ने एक और श्रमिक की जान ले ली है। रायगढ़ के लखीराम मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे मनीष कुमार ने आज उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मनीष की मौत के बाद इस दर्दनाक हादसे में मरने वाले श्रमिकों की कुल संख्या अब 24 हो गई है। फिलहाल 9 अन्य श्रमिकों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है जिनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
जांच में बड़ा खुलासा और दिग्गजों पर एफआईआर
मैदानी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि अनिल अग्रवाल पर कार्रवाई को लेकर सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज है और नवीन जिंदल जैसे उद्योगपतियों ने इस पर आपत्ति जताई है। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की है जो तकनीकी पहलुओं और फोरेंसिक सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है।
दरअसल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में हादसे की डरावनी वजह सामने आई है। बताया जा रहा है कि बॉयलर के फर्नेस में जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा होने के कारण दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया था। इसी दबाव की वजह से बॉयलर का निचला पाइप अपनी जगह से उखड़ गया और जोरदार विस्फोट हुआ। जांच में यह भी साफ हुआ है कि प्लांट के भीतर मशीनरी के रखरखाव और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई थी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पूरे घटनाक्रम की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और साफ किया है कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। प्रशासन अब घायलों को बेहतर इलाज दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में जुटा है।