130वें संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का हमला, प्रमोद तिवारी बोले – “काला कानून, लोकतंत्र विरोधी”


नई दिल्ली। गंभीर आपराधिक आरोपों में फंसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने संबंधी संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस बिल को “लोकतंत्र विरोधी” बताते हुए केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला।

तिवारी ने कहा, “दो बार भाजपा के कुकर्मों की वजह से जनता ने उन्हें अल्पमत में ला दिया। कई जगहों पर उनकी सरकार नहीं बन पाई। अब बहुमत वापस लाने के लिए यह काला कानून लाया जा रहा है। हम इस कानून को भारत का कानून नहीं बनने देंगे।”

सरकार का तर्क – राजनीति से अपराधियों की छुट्टी

बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए, जिनमें 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी शामिल है। सरकार का कहना है कि यह कदम राजनीति में अपराध को रोकने की दिशा में उठाया गया बड़ा सुधार है।

वर्तमान में संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जिसके तहत किसी मंत्री को गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में तुरंत हटाया जा सके। इसी कमी को दूर करने के लिए यह संशोधन लाया गया है।

क्या हैं बिल के प्रावधान?

बिल के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन कर यह प्रावधान किया जाएगा कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री ऐसे अपराध में दोषी पाए जाते हैं, जिसमें 5 वर्ष या उससे अधिक की सजा हो सकती है, और वे लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें अपने पद से हटना पड़ेगा।

विपक्ष बनाम सरकार

जहाँ विपक्ष इसे “काला कानून” कहकर लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, वहीं सरकार इसे राजनीति को अपराधमुक्त करने का ऐतिहासिक कदम बता रही है। अब देखना यह होगा कि इस बिल पर संसद में बहस और मतदान के दौरान क्या समीकरण बनते हैं।


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