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(Capital Raipur) आज होगा रंग श्रीकांत का आयोजन, रचना मिश्रा और सौरभ अनंत के निर्देशन में होंगी प्रस्तुतियां

(Capital Raipur)

(Capital Raipur)श्रीकांत वर्मा जी की ‘दुपहर’ कहानी का कथासार :

(Capital Raipur) राजधानी रायपुर में रंग श्रीकांत का आयोजन होने जा रहा है, शाम 6 बजे पुरातत्व और संस्कृति विभाग के सभागार में इसका आयोजन होगा. छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी, श्रीकांत वर्मा पीठ और संस्कृति विभाग संयुक्त रुप से इसे आयोजित कर रहे हैं. सबसे पहले इस आयोजन में जाने माने रंगकर्मी राजकमल श्रीकांत वर्मा की रचनाओं में नाट्य तत्व विषय पर अपना वक्तव्य देंगे. 6.15 बजे छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसायटी की ओर से रचना मिश्रा के निर्देशन में श्रीकांत वर्मा की कविताओं की द्रश्य प्रस्तुति होगी. 6.30 बजे श्रीकांत वर्मा की कहानी ‘दुपहर’ की नाट्य प्रस्तुति सौरभ अनंत के निर्देशन में विहान ड्रामा वर्क्स भोपाल की टीम करेगी.

श्रीकांत वर्मा जी की ‘दुपहर’ कहानी का कथासार :

(Capital Raipur) बिगुल और कप्तान दो लड़के हैं जो स्कूल से छुट्टी मारकर भाग निकले हैं। कप्तान एक ऐसा लड़का है जो पाँचवी कक्षा में दो बार फेल हो चुका है। उससे कम उम्र का बिगुल अब उसकी कक्षा में आ गया है। कप्तान उसका असली नाम नहीं है। वह सबसे पीछे की पंक्ति में बैठता है। वह निडर है, उद्दंड भी उसका मन हमेशा स्कूल के बाहर ही भागता है।

उसे हर शिक्षक से डाँट और मार पड़ती है, मगर वह रोता बिल्कुल नहीं। इसीलिए उसके सहपाठी उसे कप्तान पुकारते हैं। बिगुल भी कप्तान को अपना हीरो मानता है। वह कप्तान से दोस्ती करना चाहता है। आज कप्तान बिगुल को स्कूल से भगाकर ले आया है। बिगुल में बहुत सारी झिझक और डर है। उसने स्कूल से आगे की दुनिया कभी देखी ही नहीं।

(Capital Raipur) यही वजह है कि उसे कप्तान का साथ अच्छा लगता है और उसमें आत्मविश्वास भर उठता है। बिगुल नदी देखना चाहता है। कप्तान उसे खेतों, टीलों, मंदिरों और क़ब्रिस्तान के रास्ते नदी तक ले जाता है। बिगुल के सामने अब एक नदी है, जिसे जीवन में पहली बार वह देख रहा है। धीमे धीमे बहती, गुनगुनाती, हवा के संग खेलती नदी ।

वह मंत्रमुग्ध सा खड़ा उसे देखता रह जाता है। तभी कप्तान पानी में कूद पड़ता है। बिगुल उसे पुकारता रहता है। जैसे वह ख़ुद को ही पुकार रहा हो। यह कहानी बचपन और किशोरावस्था की मन:स्थितियों के रोचक अनुभव है।

पात्र परिचय :
1. कप्तान : शुभम कटियार
2. बिगुल : रुद्राक्ष भायरे
गिटारिस्ट : स्नेह विश्वकर्मा
गीत, गायक व संगीत निर्देशन : निरंजन कार्तिक
तकनीकी सहायक व प्रस्तुति व्यवस्थापक : अंकित पारोचे
अभिनय प्रशिक्षण व सहायक निर्देशक : श्वेता केतकर
प्रकाश परिकल्पना, नाट्य रूपांतरण व निर्देशक : सौरभ अनंत
प्रस्तुति : विहान ड्रामा वर्क्स, भोपाल

(Capital Raipur) रचना मिश्रा के बारे में
रचना मिश्रा छत्तीसगढ़ में इस समय सबसे सक्रिय महिला रंग निर्देशिका हैं । वे जनमंच के माध्यम से लगातार नाट्य मंचन कर रही है । पिछले एक दशक में उन्होंने बीस से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है । रचना मिश्रा ने अपने पति सुभाष मिश्र के सानिध्य में रहकर बहुत सारी साहित्यिक , सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया ।नेपथ्य में रहकर मुक्तिबोध नाट्य समारोह , हबीब तनवीर नाट्य समारोह में अहम भूमिका निभाई । बॉटनी में MSC रचना मिश्रा बहुत अच्छी गायिका भी हैं ।

गायन से गहरा लगाव होने के कारण इन्होंने बक़ायदा संगीत महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा ली । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय NSD सहित बहुत सी संस्थाओं और नाट्य निर्देशकों की वर्कशॉप में भाग लेते हुए इन्होंने पहले छत्तीसगढ़ आफिसर्स लेडीज़ क्लब के लिए नाटक तैयार कर उनका निर्देशन किया । इसके पश्चात हबीब तनवीर , हरिशंकर परसाई , मंटो , मुंशी प्रेमचंद , असग़र वजाहत आदि लेखकों की रचनाओं पर आधारित नाटकों का निर्देशन किया ।

छत्तीसगढ़ फ़िल्म एंड विज़ुअल आर्ट सोसाइटी की ओर से रंग रचना नाम से रचना मिश्रा द्वारा निर्देशित छ :नाटकों चरणदास चोर , मोर नाँव दमाद गाँव के नाँव ससुरार , प्रेमचंद के फटे जूते , लांछन , बादशाहत का ख़ात्मा , बीमार का मंचन समारोह आयोजित कर किया गया ।

इधर के कुछ सालो में देश के सुप्रसिद्ध कवियों की कविताओं का दृश्य मंचन , कविता समय के नाम से बहुत सी कविताओं का मंचन किया है । अभी हॉल ही में छत्तीसगढ़ के शहीद वीरनारायण सिंह , शहीद गैंदसिंह के जीवन संघर्ष पर आधारित नाटक के लेखन और मंचन किया । हरिशंकर परसाई की बहुचर्चित कहानी एक लड़की पाँच दीवाने का नाट्य मंचन किया । वे लगातार सक्रिय रहकर नाटकों का निर्देशन कर रही हैं ।

(Shrikant Verma's story 'Duphar')
(Shrikant Verma’s story ‘Duphar’) श्रीकांत वर्मा जी की ‘दुपहर’ कहानी का नाट्य मंचन

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