नीट यूजी 2026 के नतीजों ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक बदलावों की एक नई तस्वीर पेश की है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 16 जुलाई की देर रात परीक्षा के परिणाम जारी किए। इस साल करीब 20 लाख छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया था, जिनमें से 11.21 लाख छात्र मेडिकल, डेंटल और अन्य कोर्स में प्रवेश के लिए सफल हुए हैं। 2020 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी भी छात्र को 720 में से 720 अंक नहीं मिले हैं।
परिणामों में सबसे बड़ा बदलाव अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की भागीदारी में दिखा है। रजिस्ट्रेशन में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी 41.8 प्रतिशत थी, जो सफल छात्रों की सूची में बढ़कर 45.7 प्रतिशत हो गई। इसका सीधा अर्थ है कि लगभग हर दूसरा सफल छात्र इसी वर्ग से है। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग की भागीदारी रजिस्ट्रेशन में 29.2 प्रतिशत थी, जो सफल होने वालों में घटकर 26 प्रतिशत रह गई।
ईडब्ल्यूएस वर्ग में दिखी सबसे तेज बढ़ोतरी
पिछले 7 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो ईडब्ल्यूएस वर्ग में सबसे अधिक 76.30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद एससी वर्ग में 63.52 प्रतिशत और एसटी वर्ग में 56.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण के नए प्रावधानों के कारण इन वर्गों की भागीदारी में यह बड़ा उछाल आया है।
छोटे राज्यों ने किया कमाल
परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों के अनुपात में छोटे राज्यों का प्रदर्शन बड़े राज्यों से बेहतर रहा। चंडीगढ़ में 70.14 प्रतिशत छात्र सफल हुए। वहीं मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड के प्रदर्शन ने भी सबको हैरान किया है। बड़े राज्यों में राजस्थान का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा, जहाँ 69.34 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए। पेपर लीक के विवादों के बीच 21 जून को दोबारा आयोजित हुई यह परीक्षा 13 भाषाओं में संपन्न हुई थी।