रमेश गुप्ता भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से संगठित तरीके से स्क्रैप चोरी कर करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार करने वाले गिरोह के खिलाफ दुर्ग पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड के बाद सोमवार को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों की अवैध कमाई से अर्जित करोड़ों रुपये की संपत्ति और महंगे आभूषणों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी संजय सिंह के लॉकर से करीब 50 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण तथा लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों से भी संपत्ति संबंधी दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है। पुलिस अब आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।

फ्लू डस्ट की आड़ में चल रहा था चोरी का खेल
मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था, जब मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने हथखोज स्थित ए.के. ट्रेडर्स में छापा मारा। जांच के दौरान हाईवा और ट्रकों में फ्लू डस्ट के साथ बीएसपी से चोरी किए गए लोहे की प्लेट, बीम और अन्य स्क्रैप सामग्री लोड पाई गई। मौके पर भारी मात्रा में स्क्रैप का भंडारण भी मिला।
पुलिस जांच में सामने आया कि फ्लू डस्ट परिवहन की आड़ में बीएसपी से चोरी किया गया लोहा बाहर निकालकर अवैध रूप से बेचा जा रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 250 टन लोहे की प्लेट, बीम और अन्य स्क्रैप सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये बताई गई। वहीं परिवहन और लोडिंग में उपयोग किए जा रहे वाहन एवं मशीनरी सहित कुल 3 करोड़ 22 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई।

उत्तर प्रदेश से दबोचा गया मुख्य आरोपी
प्रकरण में पहले ही नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। मुख्य फरार आरोपी संजय सिंह की तलाश में दुर्ग पुलिस की विशेष टीम उत्तर प्रदेश भेजी गई, जहां देवरिया क्षेत्र से उसे गिरफ्तार किया गया। 16 जून को गिरफ्तारी के बाद उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था।
पूछताछ के दौरान संजय सिंह ने गिरोह से जुड़े अमित शर्मा उर्फ कैलाश शर्मा और आकाश कुमार सिंह की भूमिका उजागर की, जिसके बाद दोनों को भी गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने स्वीकार किया कि चोरी किए गए लोहे की बिक्री से प्राप्त रकम को संपत्तियों और आभूषणों में निवेश किया गया था।
फर्जी नंबर प्लेट का भी इस्तेमाल
पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल ले जाकर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। जांच में यह भी सामने आया कि चोरी के स्क्रैप के परिवहन में उपयोग किए गए वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई जाती थीं। पुलिस ने ऐसी कई नंबर प्लेट भी जब्त की हैं।
अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग पुलिस के अनुसार इस बहुचर्चित स्क्रैप चोरी प्रकरण में अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की विवेचना जारी है और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों के संबंध में आगे भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर गिरोह की आर्थिक गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य अहम तथ्य भी सामने आ सकते हैं।