छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: दुर्घटना और आपदा पीड़ितों को 15 दिन में मिलेगा मुआवजा, लोक सेवा गारंटी के दायरे में आई सेवाएँ

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को समय पर राहत पहुँचाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने मुआवजा राशि (आर्थिक सहायता) मिलने में होने वाली देरी और प्रशासनिक लेटलतीफी को खत्म करने के लिए इसे ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ के दायरे में शामिल कर लिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब अफसरों की मनमानी नहीं चलेगी और पीड़ितों या उनके परिजनों को 15 दिनों के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

लोक सेवा गारंटी के तहत तय हुई अधिकारियों की जवाबदेही
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सेवा प्रदाता अधिकारी, सक्षम अधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी भी तय कर दिए गए हैं। यदि तय समय सीमा (15 दिन) के भीतर आर्थिक सहायता नहीं मिलती है, तो नागरिकों को इसकी शिकायत और अपील करने का पूरा अधिकार होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और विशेष रूप से ग्रामीण व आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

सड़क हादसों के पीड़ितों को एसडीएम दिलाएंगे राहत
प्रदेश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण औसतन 9 से 10 हजार लोग अपनी जान गंवा देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल सड़क हादसों में ही हर साल करीब 6,500 से 7,000 लोगों की मौत हो जाती है। नई अधिसूचना के तहत, सड़क दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर रूप से घायल होने के मामलों में 15 दिनों के भीतर आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत करनी होगी। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए इसकी मुख्य जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के एसडीएम (राजस्व) को सौंपी गई है।

बाढ़, वज्रपात और सर्पदंश के मामलों में भी त्वरित सहायता
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक आपदाओं और अन्य हादसों का ग्राफ काफी बड़ा है। बीते पांच वर्षों में सर्पदंश (सांप के काटने) से 17 हजार से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई है, जबकि आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से हर साल लगभग 180 लोग अपनी जान गंवाते हैं। इसके अलावा, पिछले साल आई बाढ़ के कारण 81 लोगों की मौत हुई थी, करीब 395 मवेशियों की हानि हुई और 2 हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। अब इन सभी आपदाओं (बाढ़, आकाशीय बिजली, सर्पदंश) से प्रभावित लोगों को 15 दिनों के भीतर सरकारी मदद की गारंटी मिलेगी।

ईडब्ल्यूएस और केंद्रीय जाति प्रमाण पत्र की समय सीमा भी तय
आपदा राहत के साथ-साथ सरकार ने छात्रों और युवाओं को बड़ी राहत देते हुए प्रमाण पत्रों को लेकर भी कड़े नियम लागू किए हैं:

ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण पत्र: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का यह प्रमाण पत्र अब आवेदन के 15 दिनों के भीतर बनाकर देना होगा। इसकी जिम्मेदारी तहसीलदार को दी गई है।

केंद्रीय जाति प्रमाण पत्र: केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षा के लिए जरूरी केंद्रीय जाति प्रमाण पत्र अब मात्र 7 दिनों के भीतर जारी करना होगा। इसकी जवाबदेही एसडीएम (राजस्व) को सौंपी गई है।

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