कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कोलकाता के तपसिया स्थित एक होटल में लंबी बैठक की। इसके बाद उन्होंने अपने संगठन के नए प्रदेश नेतृत्व का एलान कर दिया।
बिप्लब मित्र बने ‘असल’ तृणमूल के नए अध्यक्ष
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मंत्री बिप्लब मित्र को अपनी कमान सौंपी है। उन्हें इस गुट की ओर से ‘असल’ तृणमूल कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया है। इसके अलावा कसबा क्षेत्र के विधायक जावेद खान को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, कुछ दिनों पहले ही ममता बनर्जी ने खुद को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया था। चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद ममता ने यह फैसला लिया था। यही वजह है कि ऋतब्रत गुट के इस कदम को सीधे ममता बनर्जी को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग पहुंचा असली पार्टी का विवाद
इस बड़ी घोषणा से ठीक पहले ऋतब्रत बनर्जी ने कानूनी तैयारी भी पूरी कर ली। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पार्टी पर अपने अधिकार को लेकर जरूरी कानूनी दस्तावेज भी सौंपे। इसके बाद ही होटल की बैठक में नई टीम के नामों पर मुहर लगाई गई। इस नए घटनाक्रम से अब तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक संघर्ष पूरी तरह से चुनाव आयोग के पाले में चला गया है।
नई टीम में किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
पार्टी के इस नए गुट ने महिलाओं, युवाओं और छात्रों को साधने के लिए नई नियुक्तियां की हैं।
- चंद्रिमा भट्टाचार्य को राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है।
- महिला संगठन की कमान सबीना यासमीन और शिउली साहा को दी गई है।
- छात्र इकाई की जिम्मेदारी सुदीप राहा और कोहिनूर मजूमदार संभालेंगे।
- युवा संगठन का दायित्व अनीसुर रहमान विदेश को सौंपा गया है।
- अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ की कमान आशीष मार्जित को मिली है।
21 जुलाई के शहीद दिवस पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि उनका संगठन 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाएगा। इसके लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। कोलकाता पुलिस ने उन्हें विक्टोरिया हाउस के सामने कार्यक्रम करने की मंजूरी नहीं दी है। इसलिए अब गांधी प्रतिमा के सामने आयोजन की इजाजत मांगी गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह आयोजन दोनों गुटों के लिए असली ताकत दिखाने का बड़ा जरिया बनेगा। नतीजतन, आने वाले दिनों में बंगाल की जमीनी राजनीति में टकराव और बढ़ सकता है।