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Bhupesh then trust me : भूपेश हैं तो भरोसा है, सी एम का भाटापारा प्रवास क्या पूरी होगी जिले की आस?

Chhattisgarh NewsBhupesh then trust me : भूपेश हैं तो भरोसा है, सी एम का भाटापारा प्रवास क्या पूरी होगी जिले की आस?

Bhupesh then trust me : भूपेश हैं तो भरोसा है, सी एम का भाटापारा प्रवास क्या पूरी होगी जिले की आस?

राजकुमार मल

Bhupesh then trust me : सी एम का भाटापारा प्रवास क्या पूरी होगी जिले की आस?

Bhupesh then trust me :
Bhupesh then trust me : भूपेश हैं तो भरोसा है, सी एम का भाटापारा प्रवास क्या पूरी होगी जिले की आस?

Bhupesh then trust me : Bhatapara !  जब-जब विश्व आदिवासी दिवस की बात होती है तब तब क्षेत्र के निवासियों को मुख्यमंत्री का किया हुआ वायदा याद आ जाता है। 4 साल पहले इसी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाटापारा को कांग्रेस की सरकार आने पर पृथक जिला बनाने की बात कही थी तब वे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे।

Bhupesh then trust me : लोकोत्सव मैदान में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह के मध्य मंच से उन्होंने एलान किया था कि कांग्रेस की सरकार आने पर भाटापारा निश्चित रूप से जिला बनेगा । परंतु विडंबना ही है कि अपने कार्यकाल के लगभग 4 साल व्यतीत होने के उपरांत भी उन्होंने भाटापारा को जिला का दर्जा नहीं दिया । क्षेत्र की जनता स्थानीय कांग्रेस नेताओं को जरूर सवालों के घेरे में खड़ा करती है तब वे कहते है कि मुख्यमंत्री जी अपना किया हुआ वादा जरुर निभाएंगे । “भूपेश हैं तो भरोसा है” ।


Bhupesh then trust me : क्षेत्र की जनता के साथ विगत 35 वर्षों से दोनों ही दलों के द्वारा कुठाराघात किया जा रहा है । बीते 35 वर्षों से केवल आश्वासन पर यहां की जनता जी रही है । जिले की मजबूत दावेदारी के बाद भी जिले की सौगात यहां की जनता को नहीं मिल पाने से यहां की जनता आहत है।

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Bhupesh then trust me : अब जबकि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 18 अगस्त को प्रदेश के मुखिया पुनः भाटापारा आ रहे हैं तब भाटापारा क्षेत्र के निवासियों की आस फिर से जगी है कि मुख्यमंत्री अपना किया हुआ वादा जरुर निभाएंगे और भाटापारा के निवासियों को जिले की सौगात देंगे।

इधर जिला निर्माण संघर्ष समिति लगातार कांग्रेसी नेताओं के संपर्क में हैं और भाटापारा को जिला घोषित करवाने के लिए प्रयासरत है। यदि 18 अगस्त को भाटापारा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री के द्वारा जिले की घोषणा नहीं की जाती है तो संघर्ष समिति पुनः आंदोलन के रास्ते पर अग्रसर होगी।

विदित हो कि शासन यदि दुबे आयोग की रिपोर्ट को लागू करती तो 35 साल पहले ही भाटापारा जिला बन गया होता लेकिन शासन ने दुबे आयोग की रिपोर्ट की अनदेखी की। सरकारे बदलती रही लेकिन इस रिपोर्ट की अनदेखी लगातार होती रही और भाटापारा जिला बनने से वंचित रहा।

प्रदेश की सबसे बड़ी नगरपालिका होने के बावजूद भी भाटापारा विकास को तरस रहा है इसका जिम्मेदार यहां के जनप्रतिनिधि हैं जिन्होंने भाटापारा के साथ कभी न्याय नहीं किया। जिले के नाम पर गेंद को इस पाले से उस पाले में डालना यहां के जनप्रतिनिधियों की नियति बन चुकी है जिसका दंश क्षेत्र की जनता को भोगना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि 18 अगस्त को मुख्यमंत्री अपने वादे को पूरा करते हैं या नहीं क्षेत्र की जनता को 18 अगस्त का बेसब्री से इंतजार है…।

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