नई दिल्ली: टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन एयर इंडिया ने फ्यूल सरचार्ज के ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है। कंपनी 8 अप्रैल 2026 से पुराने फ्लैट सरचार्ज सिस्टम को समाप्त कर दूरी के आधार पर नया स्लैब सिस्टम लागू करने जा रही है। इस निर्णय के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही रूट पर विमान किराया बढ़ना तय है। कंपनी ने यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी के चलते उठाया है।
एयर इंडिया के अनुसार, नया सरचार्ज ढांचा घरेलू रूट पर 8 अप्रैल से और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट पर 10 अप्रैल से प्रभावी होगा। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए यह स्लैब सिस्टम तैयार किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर
नए नियमों के तहत सबसे लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूट जैसे उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रति सेक्टर (एक तरफ) 280 डॉलर यानी लगभग 23,400 रुपये का सरचार्ज देना होगा। इसका मतलब है कि आने-जाने की टिकट पर यात्रियों को करीब 47,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे। इसी तरह यूरोप और ब्रिटेन के रूट पर प्रति सेक्टर लगभग 17,000 रुपये, खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट) के लिए लगभग 4,200 रुपये और सार्क देशों जैसे नेपाल व श्रीलंका के लिए लगभग 2,000 रुपये का अतिरिक्त सरचार्ज देय होगा।
घरेलू उड़ानों के लिए दूरी आधारित मॉडल
घरेलू यात्रा के लिए भी एयर इंडिया ने अब एक समान सरचार्ज की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब यात्रियों को तय की गई दूरी के हिसाब से भुगतान करना होगा। 500 किलोमीटर तक की कम दूरी के सफर के लिए प्रति सेक्टर 299 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, 2,000 किलोमीटर से अधिक की लंबी दूरी के रूट पर यह राशि बढ़कर 899 रुपये तक हो जाएगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव घरेलू विमान ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि को देखते हुए किया गया है। इस फैसले से गर्मियों की छुट्टियों में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।