0 छत्तीसगढ़ की धरती में कदम रख बहुत खुशी 0
0 सरायपाली महासमुंद की पुलिस बेहतर सहयोगी
दिलीप गुप्ता
सरायपाली (महासमुंद)। Sameera Khan : जब तक महिलाएं व युवतियां अपने आप को महिला या युवती होने की मानसिकता रखेंगी, तब तक वे समाज में अपनी पहचान व दृढ़ संकल्प को साबित नहीं कर पाएगी। इसलिए सभी लड़कियों को अपनी मानसिकता को पहले बदलना होगा, तभी हम देश व समाज में कंधे से कंधा मिलाकर चल पाएंगे और अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन भी कर सकेंगे।”
उक्त संदेश आज आंध्र प्रदेश निवासी पर्वतारोही व साइक्लिस्ट समीरा खान ने ‘आज की जनधारा’ के साथ एक मुलाकात में व्यक्त करते हुए कहे।
साइक्लिस्ट समीरा खान की उम्र महज 30 वर्ष है, किंतु इतनी कम उम्र के बावजूद उनकी हिम्मत, मेहनत, दृढ़संकल्प व साहस की दाद देनी होगी। उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति को ध्यान में रखते हुए अभी तक 37 देशों की सायकल यात्रा की है। वर्तमान में भारत यात्रा के दौरान लगभग 7000 किलोमीटर की दूरी तय करने व देश के विभिन्न हिस्सों से परिचित होने के लिए, विगत वर्ष मार्च 2025 में उन्होंने अपने गृह नगर आंध्र प्रदेश से सायकल यात्रा शुरू की। देश के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व ओडिशा होते हुए वे आज 28 जुलाई 2026 को प्रातः छत्तीसगढ़ के सरायपाली पहुंचीं।

ज्ञातव्य हो कि उनकी इस सायकल यात्रा को छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग से सुरक्षा व सहयोग प्राप्त है, जो उनके साथ-साथ चलता है। यह सुरक्षा उन्हें पूरे छत्तीसगढ़ के दौरे तक उपलब्ध होगी।
थाना में टीआई रितेश सिंह यादव व पुलिस स्टाफ ने किया स्वागत
राज्य की सीमा में प्रवेश करने के दौरान विभिन्न संगठनों ने समीरा खान का स्वागत किया। नगर प्रवेश के दौरान वे सर्वप्रथम थाना गईं, जहां नवपदस्थ टीआई रितेश सिंह यादव के साथ ही समस्त पुलिस स्टाफ द्वारा समीरा खान का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया व उनके इस अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दी गईं।
‘आज की जनधारा’ को दिए गए साक्षात्कार में साइक्लिस्ट व पर्वतारोही समीरा खान ने बताया कि वे अभी तक 11 राज्यों में लगभग 7000 किलोमीटर की सायकल यात्रा कर चुकी हैं। इस दौरान विभिन्न शहरों व नगरों के स्कूलों व कॉलेजों में छात्राओं के साथ अपने संस्मरणों पर बातचीत की। समीरा खान ने कहा, “इस समय जब लड़कियां मेरे पास खुलकर चर्चा करती हैं, अपनी आकांक्षाओं व समाज में चुनौतियों का सामना करने की बात कहती हैं, तो मुझे काफी दुख होता है और भावुक होकर मानवीय चेहरा सामने आता है। वे ऐसा सोचकर अपने जीवन के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने वाली एक इंसान के रूप में खुद को रोक रही हैं।”
11 पर्वत चोटियों पर फहराया परचम, नेपाल की अबा डबलाम चोटी सबसे खास
5 भाई-बहनों में सबसे छोटी समीरा खान इतनी कम उम्र में कुशल पर्वतारोही हैं और वे हिमालय व यूरोप की 11 चोटियों पर विजय प्राप्त कर चुकी हैं। वे नेपाल स्थित अबा डबलाम चोटी (6859 मीटर ऊँची) पर चढ़ाई को अपना सर्वाधिक उल्लेखनीय साहसिक कार्य मानती हैं।
बालिका सशक्तिकरण की अलख जगाने सरायपाली पहुंची पर्वतारोही व साइक्लिस्ट समीरा खान ने नगर के स्कूलों—ईवास वुडलैंड, एकलव्य स्कूल व कन्या शाला—में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि छात्राएं बड़े सपने देखें और उसे पाने के लिए रास्ता बनाएं। समीरा ने छात्राओं से कहा कि, “हम महिला नहीं इंसान हैं। हमें महिला के नाम पर कमजोर नहीं बनना है, खुद की प्रतिभा को निखारकर शक्तिशाली बनना है।” इस दौरान छात्राओं को समानता, लिंग भेदभाव और यौन उत्पीड़न जैसी सामाजिक बाधाओं के बारे में जागरूक किया गया।
पिता के देहांत के बाद नहीं मानी हार, समाजशास्त्र में किया है ग्रेजुएशन
बातचीत में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर शहर की रहने वाली समीरा खान ने बताया कि वे पर्वतारोही बनने का सपना देखकर मिशन माउंट एवरेस्ट पर घर से निकली थीं। वे अब तक फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, तुर्की, नीदरलैंड, स्पेन, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और जापान की यात्रा कर चुकी हैं।
वर्ष 2015 में पिता के देहांत के बाद वे मिशन माउंट एवरेस्ट पर निकलीं और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं। समाजशास्त्र एवं पर्यावरण विज्ञान से स्नातक समीरा खान ने यह साबित कर दिया कि परिवार के सहयोग के बिना भी लड़कियां आगे बढ़ सकती हैं। जब वे नौ साल की थीं, तभी उनकी मां का साया सिर से उठ गया था। इसके बाद उन्होंने भारत में ‘बालिका समानता अभियान’ चलाने का निर्णय लिया और अपने मिशन माउंट एवरेस्ट के साथ बालिका सशक्तिकरण को जोड़ा। उन्होंने अपनी पहली यात्रा मार्च 2025 में अपने शहर अनंतपुर से शुरू की थी। समीरा ने पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ पुलिस की काफी सराहना की और सभी को धन्यवाद दिया।
सरायपाली के बाद महासमुंद व रायपुर की ओर बढ़ेंगी आगे
सरायपाली से समीरा खान महासमुंद होते हुए रायपुर के लिए निकलेंगी। इसके बाद वे नागपुर और तेलंगाना होते हुए सीधे अपने गृह नगर अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) वापस जाएंगी।