अंतरास्ट्रीय महिला दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन शासकीय महाविद्यालय में आयोजित किया गया।

महिलाओं के बिना समाज अधूरा – अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वंदना देवांगन 0
दिलीप गुप्ता

सरायपाली= महिला दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन एवं नालसा के निर्देशानुसार अभियान के तहत महिला दिवस संबंधी विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन शासकीय महाविद्यालय में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती वंदना दीपक देवांगन ( प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरायपाली ) सभा को संबोधित करते हुवे कहा गया कि ‘नारी कभी कमजोर नहीं होती, बस उसे पहचानने की जरूरत होती है, महिला सशक्तिकरण केवल महिला का अधिकार नहीं बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है।’ आज हम यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। यह दिन हमें महिलाओं के अद्भुत योगदान और उनके संघर्षों को याद दिलाता है। जैसा कहा गया है कि नारी कभी कमजोर नहीं होती, बस उसका संघर्ष करने का तरीका अलग होता है।
महिला दिवस भी सिर्फ महिलाओं के लिए जश्न का दिन नहीं है बल्कि यह समाज को यह याद दिलाने का अवसर है कि महिलाओं के बिना कोई समाज पूरा नहीं होता। उनके योगदान को पहचानना और उनका सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है।


महिलाओं की समाज में भूमिका पर कहा गया कि महिलाएं समाज की रीढ़ हैं। रानी लक्ष्मीबाई का साहस, सरोजिनी नायडू की ताकतवर वाणी, कल्पना चावला का अंतरिक्ष में उड़ना या किरण बेदी का मजबूत नेतृत्व, ये दिखाते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति, रक्षा और व्यापार… हर जगह महिलाएं अपनी मेहनत और काबिलियत से अपनी पहचान व नाम बनाने में सफल हो रही हैं।
आज हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि महिलाओं को समान अवसर और सम्मान देंगे, क्योंकि नारी शक्ति अजेय है।
समाज में महिला सशक्तिकरण समाज की असली नींव है। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानित होंगी, तभी समाज प्रगति करेगा। उनकी ताकत से परिवार मजबूत होता है और राष्ट्र की उन्नति सुनिश्चित होती है। हम सभी निष्पक्षता का समर्थन करके, महिलाओं का सम्मान करके और महिलाओं को उनके सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित करके अपनी भूमिका निभा सकते हैं। आइए हम इस दिन का जश्न मनाएं और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए मिलकर दूसरों को जागरूक करें। साथ ही उपस्थित लोगों को निशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत तथा हेल्पलाइन नंबर 1993, 14446, 15100 के संबंध में जानकारी दी गई। नालसा की जागृति योजना, आशा योजना एवं डॉन योजना के उद्देश्यों व लाभों से छात्र छात्राओं को अवगत कराया गया।


इस अवसर पर युवा महिला अधिवक्ता अनम खान ने कहा कि न्याय के क्षेत्र में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वंदना देवांगन जैसी मज़बूत महिलाओं को देखकर मुझ जैसे युवा स्टूडेंट्स को बड़े सपने देखने और ज़्यादा मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।
अपने पिता, एडवोकेट के. बी. खान, और अपनी माता अलमास खान, और डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट रायपुर में प्रैक्टिस करने वाले अपने भाई एम.डी. शारिक खान का भी बहुत शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए हिम्मत दी। जैसा कि वंदना मैम ने एक बार बहुत खूबसूरती से कहा था, लड़कियों को घर की ज़िम्मेदारियों तक सीमित रखने के बजाय, हमें उनके हाथों में कलम देनी चाहिए और उन्हें ज्ञान की ताकत देनी चाहिए।जिससे महिलाएं आत्म निर्भर हो सके ।


एक स्टूडेंट के तौर पर जो भविष्य में न्याय दिलाने का सपना देखती है, मेरा मानना ​​है कि जब एक लड़की को पढ़ाया-लिखाया जाता है और सपोर्ट किया जाता है, तो वह कुछ भी हासिल कर सकती है और समाज में अच्छा योगदान दे सकती है।
इस अवसर पर न्यायालय के अधिकारियों के साथ साथ अनेक गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

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