रायपुर। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के बदले सरकार की ओर से प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। लेकिन पिछले कई वर्षों से इस राशि में बढ़ोतरी नहीं होने के कारण निजी स्कूल संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने प्रदेशभर में असहयोग आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। संगठन ने परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक निजी स्कूल अपनी बसें परिवहन विभाग के किसी भी कार्यक्रम के लिए उपलब्ध नहीं कराएंगे।
13 वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि में नहीं हुआ संशोधन
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई के एवज में मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में पिछले 13 वर्षों से कोई संशोधन नहीं किया गया है। इस संबंध में बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई थी। अदालत ने 19 सितंबर 2025 को अपने आदेश में राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को छह महीने के भीतर इस मामले में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सरकार से प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मिलने वाली राशि बेहद कम है, जिससे स्कूलों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र प्रति वर्ष मिलने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर 18,000 रुपये किया जाए। इसी तरह माध्यमिक कक्षाओं के लिए 11,500 रुपये की जगह 22,000 रुपये और हाई व हायर सेकेंडरी स्तर के लिए अधिकतम सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग रखी गई है। साथ ही संगठन ने यह भी आग्रह किया है कि बढ़ी हुई राशि को पिछले तीन वर्षों से प्रभावी माना जाए।
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया निर्णय
एसोसिएशन के मुताबिक 1 मार्च को छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं करता, तब तक राज्यभर के निजी स्कूल असहयोग आंदोलन जारी रखेंगे।

परिवहन विभाग को बसें देने से किया इंकार
संगठन द्वारा परिवहन आयुक्त को भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अक्सर विभिन्न जिलों के परिवहन अधिकारी अपने कार्यक्रमों के लिए निजी स्कूलों से बसों की मांग करते हैं। लेकिन जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक स्कूल अपनी बसें किसी भी सरकारी कार्यक्रम के लिए उपलब्ध नहीं कराएंगे। साथ ही आंदोलन के तहत निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे और विभाग से जारी किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी नहीं दिया जाएगा।
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने का निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल निजी स्कूलों पर नहीं डाली जा सकती, बल्कि सरकार को भी इसके लिए पर्याप्त आर्थिक सहयोग देना होगा।
