पटना
बिहार में खाली हो रही राज्यसभा की पांच सीटों के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि पांचवीं सीट के लिए मुकाबला रोमांचक हो गया है। इस चुनावी गणित के बीच एआईएमआईएम ने राजद पर तीखा हमला बोला है, जिससे विपक्षी खेमे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
वोटों का गणित और एआईएमआईएम की भूमिका
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 41 वोटों की आवश्यकता है। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे उसकी चार सीटें सुरक्षित दिख रही हैं। दूसरी ओर, महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। ऐसे में पांचवीं सीट के लिए राजद और कांग्रेस को एआईएमआईएम के 5 विधायकों और बसपा के एक विधायक के समर्थन की सख्त जरूरत है। एआईएमआईएम इसी मजबूरी का लाभ उठाते हुए आक्रामक रणनीति अपना रही है और अपनी शर्तें सामने रख रही है।
पवन सिंह और बीजेपी की रणनीति
भाजपा इस बार राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रभाव के साथ-साथ हाई-प्रोफाइल चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है। पार्टी के भीतर भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह के नाम पर गंभीर मंथन चल रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पवन सिंह को राज्यसभा भेजने से भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में पार्टी का आधार मजबूत होगा, जिसका लाभ आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी मिल सकता है। अन्य संभावित नामों में संजय मयुख और किसी तकनीकी विशेषज्ञ या वरिष्ठ चेहरे पर भी विचार किया जा रहा है।
खाली हो रही सीटें और दांव पर साख
जिन पांच सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें एनडीए कोटे से हरिवंश (जदयू), रामनाथ ठाकुर (जदयू) और उपेंद्र कुशवाहा (आरएलएम) की सीटें शामिल हैं। वहीं राजद कोटे से प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह की सीटें खाली हो रही हैं। कमजोर संख्या बल के कारण राजद के लिए अपनी दोनों सीटें बचा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जदयू भी अपने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों की घोषणा की तैयारी में है।