सरकार ने 26 लाख घरों की स्वीकृति दी, बजट में 4,000 करोड़ का प्रावधान

कोरिया। सरकार ने देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के सिर पर छत देने के अपने संकल्प को दोहराते हुए एक बड़ी उपलब्धि साझा की है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया है कि ‘मोर आवास-मोर अधिकार’ अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सत्ता संभालने के बाद से अब तक सरकार ने कुल 26 लाख आवासों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

बजट में बड़ा वित्तीय प्रावधान आवास योजना को गति देने के लिए वित्त वर्ष के बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 4,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की कमी को दूर करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।

“बहता पानी निर्मला” पुरानी योजनाओं में बदलाव की जरूरत नीतिगत परिवर्तनों पर जोर देते हुए सरकार ने “बहता पानी निर्मला” का उदाहरण दिया। इसका अर्थ है कि जिस प्रकार बहता हुआ पानी ही शुद्ध रहता है, उसी प्रकार योजनाओं को भी समय के साथ गतिशील और प्रासंगिक बने रहना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया कि 20 साल पुरानी योजनाओं को बिना किसी बदलाव के आज के दौर में लागू नहीं किया जा सकता। यदि देश को निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ाना है, तो पुरानी नीतियों में सुधार और नवाचार अनिवार्य है विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम इसी दूरदर्शी सोच के साथ केंद्र सरकार अब और अधिक बजट और उच्च महत्वाकांक्षा के साथ एक नवीन योजना, ‘विकसित भारत’ को धरातल पर उतारने जा रही है। इस योजना का उद्देश्य केवल आवास मुहैया कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में आमूलचूल परिवर्तन लाना है।

वक्तव्य के अंत में ” राम जी” के उद्घोष के साथ विकसित भारत के संकल्प को दोहराया गया, जो आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। खेल और कृषि के बाद अब आवास क्षेत्र में यह बड़ी निवेश योजना देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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