प्रेम की गालियाँ

बाबुषा कोहली

तुम्हें औषध मिले, पीर न मिले

दृष्टि मिले, दृश्य न मिले

नींदें मिलें, स्वप्न न मिले

गीत मिलें, धुन न मिले

नाव मिले, नदी न मिले

प्रिय!

तुम पर प्रेम के हज़ार कोड़े बरसें

तुम्हारी पीठ पर एक नीला निशान तक न मिले

स्रोत : हिन्दवी

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