रांची। झारखंड के 48 शहरी स्थानीय निकायों में होने वाले चुनाव अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गए हैं। सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के दो प्रमुख सहयोगी दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने अधिकांश नगर निगमों में महत्वपूर्ण पदों के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा की है। राज्य में निकाय चुनाव के लिए 23 फरवरी को मतदान होगा, जबकि इसके परिणाम 27 फरवरी को घोषित किए जाएंगे।
पांच साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहे ये चुनाव इस बार गैर-दलीय आधार पर आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और जेएमएम जैसी मुख्यधारा की पार्टियों ने नौ नगर निगमों के महापौर और राज्य भर की नगर परिषदों व नगर पंचायतों के अध्यक्ष पदों के लिए विशिष्ट उम्मीदवारों को अपना समर्थन दिया है। गठबंधन के बीच संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति न बन पाने के कारण जेएमएम और कांग्रेस दोनों ने ही अपने समर्थित प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सोनल शांति ने कहा कि निकाय चुनाव अति-स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, इसलिए इसे गठबंधन में मतभेद के रूप में देखना गलत होगा। वहीं जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने भी समान विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव पार्टी चिन्हों पर नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उम्मीदवारों का व्यक्तिगत जुड़ाव और स्थानीय कारक सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पारंपरिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाली जेएमएम अब इन चुनावों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है, जहां आमतौर पर भाजपा और कांग्रेस का प्रभाव अधिक रहा है। हालांकि, पार्टी चिन्हों का उपयोग न होने के कारण इस बार दलों की आधिकारिक ताकत का सीधा प्रभाव कम रहने की संभावना है। प्रशासन ने चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली हैं और 8 फरवरी को नामांकन वापसी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब चुनावी मैदान पूरी तरह सज चुका है।