डोंगरगढ़: आज से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, साधना, मंत्र और आध्यात्मिक शक्ति का विशेष महत्व

डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़), 19 जनवरी 2026: हिंदू परंपरा में गुप्त नवरात्रि को शक्ति आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण और रहस्यमयी पर्व माना जाता है। माघ मास में पड़ने वाली इस नवरात्रि के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में गहन आध्यात्मिक वातावरण छाया हुआ है।

यह नवरात्रि चैत्र या शारदीय नवरात्रि की तरह सार्वजनिक उत्सव और भव्य आयोजनों के लिए नहीं, बल्कि अंतर्मुखी साधना, मंत्र जप और आत्मिक शक्ति जागरण के लिए जानी जाती है। गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार माघ और आषाढ़ मास में आती है। ‘गुप्त’ शब्द इसकी गोपनीय प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें साधक अपनी साधना को गुप्त रखते हुए दिखावे से दूर देवी शक्ति की उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ आत्मबल में वृद्धि करती है।

इस नवरात्रि में देवी दुर्गा के उग्र और सिद्धिदायी स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व है। साधक मंत्र जप, ध्यान, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत के माध्यम से शक्ति साधना करते हैं। यह साधना भय, रोग, मानसिक अस्थिरता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती है। सामान्य श्रद्धालु भी सरल पूजा और संयमित जीवनचर्या अपनाकर मां की कृपा प्राप्त करते हैं।

मां बम्लेश्वरी धाम, जो पूरे देश में आस्था का प्रमुख केंद्र है, गुप्त नवरात्रि के दौरान शांत साधना स्थल के रूप में उभरता है। यहां आने वाले श्रद्धालु और साधक भीड़-भाड़ से दूर रहकर मां के चरणों में ध्यान और जप में लीन रहते हैं। मंदिर परिसर में विशेष अनुशासन, स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखा जाता है ताकि साधकों को पूर्ण एकाग्रता मिल सके।

स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि मां बम्लेश्वरी धाम में गुप्त नवरात्रि की साधना विशेष रूप से फलदायी होती है। इसी कारण हर वर्ष सीमित संख्या में आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु यहां पहुंचकर शक्ति उपासना करते हैं। गुप्त नवरात्रि व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर कर आंतरिक शक्ति से जोड़ती है। मां बम्लेश्वरी धाम में यह पर्व श्रद्धा, साधना और आत्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बनकर भक्तों को शक्ति, धैर्य और संतुलन की अनुभूति करा रहा है।

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