गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति के आचरण पर विवाद, विधायक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति से की बर्खास्तगी और जांच की मांग

बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। साहित्यिक शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान कुलपति के कथित आचरण को मर्यादा के विपरीत बताया जा रहा है, जिससे देशभर से आए साहित्यकारों और कार्यक्रम में मौजूद छात्रों को गहरा आघात पहुंचा है। इस घटना के बाद कुलपति का व्यवहार सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कुलपति को तत्काल पद से हटाने और उनके पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। पत्र में विधायक ने उल्लेख किया है कि “समकालीन हिन्दी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद जैसे गरिमामय मंच पर कुलपति द्वारा अतिथियों से संवाद की मर्यादा का उल्लंघन किया गया। शैक्षणिक विमर्श के लिए बने मंच को विवाद का रूप दे दिया गया, जिससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा है।

विधायक ने पत्र में यह भी लिखा है कि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और शिक्षाविदों में गहरा रोष देखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम संस्थागत अनुशासनहीनता का गंभीर मामला प्रतीत होता है।

पत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा है। एनएसएस कैंप से जुड़े मामलों में शिक्षकों के उत्पीड़न के आरोप, छात्र प्रतिनिधियों से संवाद से इनकार, मिलने की मांग करने वाले छात्र को बिना स्पष्ट कारण स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करना, छात्रावासों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और विश्वविद्यालय परिसर में छात्र की मृत्यु जैसी घटनाएं पहले ही कई सवाल खड़े कर चुकी हैं। इसके अलावा शिक्षकों की नियुक्तियों में लेन-देन के आरोप भी विश्वविद्यालय की छवि को प्रभावित करने वाले बताए गए हैं।

विधायक ने यह भी रेखांकित किया है कि छत्तीसगढ़ के संत शिरोमणि गुरु घासीदास के नाम पर स्थापित यह केंद्रीय विश्वविद्यालय अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल क्षेत्र में स्थित है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ऐसे में कुलपति का आचरण केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि वर्तमान नेतृत्व में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा और भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

विधायक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि विश्वविद्यालय और छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए कुलपति को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए और उनके कार्यकाल के दौरान की गई सभी नियुक्तियों एवं निर्णयों की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इसी से विश्वविद्यालय की खोई हुई साख और अकादमिक वातावरण को पुनः स्थापित किया जा सकता है।

यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम में हुए विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जवाबदेही, लोकतांत्रिक संवाद और शैक्षणिक मर्यादा जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ गया है। अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति भवन और उच्च शिक्षा मंत्रालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *