तीन दिवसीय हड़ताल के आखिरी दिन कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन की सरकार को चेतावनी, मांगे नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारी और अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में की जा रही तीन दिवसीय हड़ताल का आज 31 दिसंबर को आखिरी दिन रहा। राजधानी रायपुर के इनडोर स्टेडियम सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को दोहराया।

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें यह जानकारी मिली है कि सरकार संवाद करना चाहती है। यदि ऐसा है तो संगठन बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन साथ ही फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी 11 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

हड़ताल के आखिरी दिन राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। फेडरेशन के संभाग प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति के लिए ब्यूरोकेट और सरकार दोनों जिम्मेदार हैं। अधिकारियों द्वारा फाइलें आगे बढ़ाने में देरी की जाती है और सरकार भी कर्मचारियों के हित में फैसले लेने में सुस्ती दिखा रही है, जिसके चलते यह हालात बने हैं।

फेडरेशन का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को देय तिथि से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) अब तक नहीं दी जा रही है। साथ ही लंबित एरियर्स और अन्य सुविधाएं भी अटकी हुई हैं, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों में भारी नाराजगी है। संगठन ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान DA एवं DR दिया जाए तथा वर्ष 2019 से लंबित एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए।

फेडरेशन की प्रमुख मांगों में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में शिथिलता, संविदा और दैनिक वेतनभोगी और अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण, सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने, वेतन विसंगतियों का निराकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन शामिल है।

कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन ने दो टूक कहा है कि वे संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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