कौन बनेगी छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली?

जनता करेगी फैसला, प्रकृति पाएगी नई पहचान

राजकुमार मल

भाटापारा- छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक विरासत में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। राज्य सरकार ने पहली बार राजकीय तितली चुनने के लिए आम नागरिकों को मतदान का अवसर दिया है। यह पहल केवल एक राजकीय प्रतीक के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का प्रयास है।

तितलियाँ प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक होने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वास्थ्य की जीवंत संकेतक भी हैं। किसी क्षेत्र में तितलियों की विविधता वहाँ के वन, जल, जलवायु और वनस्पतियों की गुणवत्ता का संकेत देती है। इसलिए वैज्ञानिक इन्हें “बायो-इंडिकेटर” अर्थात् जैव संकेतक कहते हैं।

छत्तीसगढ़ के लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती, उदंती-सीतानदी और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला जैसे संरक्षित क्षेत्र अनेक दुर्लभ तितली प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास हैं।

मुख्य दावेदार तितलियाँ

  1. कॉमन बैंडेड पीकॉक

विशेष पहचान

  • काले पंखों पर चमकीली हरी पट्टी।
  • मोर के पंख जैसी आभा।
  • पश्चिमी एवं पूर्वी घाटों के साथ मध्य भारत के नम वनों में भी पाई जाती है।
  • स्वस्थ वनों की प्रतिनिधि प्रजाति।

क्यों बन सकती है राजकीय तितली?

  • वनों की समृद्धि का प्रतीक
  • अत्यंत आकर्षक एवं दुर्लभ स्वरूप
  • संरक्षण का मजबूत संदेश
  1. ऑरेंज ओकलीफ

विशेष पहचान

  • पंख बंद करने पर सूखे पत्ते जैसी।
  • पंख फैलाने पर चमकीला नारंगी और नीला रंग।
  • दुनिया की सबसे प्रसिद्ध छलावरण वाली तितलियों में शामिल।

रोचक तथ्य

शिकारी पक्षी इसे अक्सर सूखा पत्ता समझकर छोड़ देते हैं।

  1. स्पॉट स्वॉर्डटेल

विशेष पहचान

  • लंबी तलवार जैसी पूँछ।
  • अत्यंत तेज़ उड़ान।
  • सफेद-काले धब्बेदार पंख।

विशेष महत्व

परागण में सक्रिय भूमिका निभाती है तथा वनों एवं नदी किनारे सामान्यतः दिखाई देती है।

  1. कॉमन जेज़ेबेल
  • लाल, पीले, सफेद और काले रंगों का अद्भुत संयोजन।
  • धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाली तितली।
  1. ब्लू मॉर्मन
  • भारत की सबसे बड़ी तितलियों में से एक।
  • गहरे काले पंखों पर चमकीले नीले धब्बे।
  • भव्य आकार के कारण प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद।
  1. कॉमन मॉर्मन
  • नींबू वर्गीय पौधों पर जीवन चक्र पूरा करती है।
  • कृषि क्षेत्रों में भी आसानी से दिखाई देती है।
  • किसानों के लिए परिचित तितली।

तितलियाँ क्यों हैं महत्वपूर्ण?

  • प्राकृतिक परागण में सहायता
  • पर्यावरणीय गुणवत्ता की जैव संकेतक
  • पक्षियों एवं अन्य जीवों के भोजन का स्रोत
  • जैव विविधता संरक्षण की आधारशिला
  • इको-टूरिज्म को बढ़ावा

तितलियों को आकर्षित करने वाले पौधे

  • लैंटाना (नियंत्रित परिस्थितियों में)
  • पेंटास
  • कॉसमॉस
  • गेंदा
  • आक
  • नींबू वर्गीय पौधे
  • करंज
  • कचनार
  • जंगल जलेबी
  • देशी जंगली पुष्पीय वनस्पतियाँ

क्या करें?

  • स्थानीय पुष्पीय पौधों का रोपण करें।
  • बटरफ्लाई गार्डन विकसित करें।
  • रासायनिक कीटनाशकों का सीमित उपयोग करें।
  • बच्चों को प्रकृति भ्रमण कराएँ।
  • प्राकृतिक झाड़ियों का संरक्षण करें।

क्या न करें?

  • अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग।
  • फूलदार झाड़ियों का पूर्ण सफाया।
  • तितलियों का संग्रह या शिकार।
  • वन क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण।

सामाजिक भागीदारी का सशक्त माध्यम

राजकीय तितली का चयन केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण की दिशा में सामाजिक भागीदारी का सशक्त माध्यम है। कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल जैसी प्रजातियाँ छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। यदि प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय और ग्राम पंचायत में ‘बटरफ्लाई गार्डन’ विकसित किए जाएँ, तो यह राज्य तितली संरक्षण और प्रकृति शिक्षा का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

“तितली बचेगी, तो प्रकृति सजेगी — छत्तीसगढ़ की पहचान रंगों के संग।”

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *