मनरेगा घोटाले पर EOW का बड़ा एक्शन: 8 पूर्व अफसरों पर कोर्ट में 6000 पन्नों का चालान पेश

Kanker MGNREGA Scam EOW : कांकेर। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामग्री खरीदी में कथित 1,69,14,247 रुपए की आर्थिक अनियमितता के 18 वर्ष पुराने मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने एक बर्खास्त तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ तथा सात तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ के विरुद्ध विशेष न्यायालय में 6,000 पृष्ठों का चालान प्रस्तुत किया है।

ब्यूरो द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 31/2008 में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 एवं 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत विवेचना पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कांकेर की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

नियमों को दरकिनार कर की गई केंद्रीयकृत खरीदी

विवेचना में सामने आया कि वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 के दौरान मनरेगा योजना के लिए फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन पत्रक, रोजगार गारंटी योजना मार्गदर्शिका, रोजगार उपलब्धता पंजी, फ्लेक्सी कोबरा फाइल कवर, मस्टर रोल पत्रक तथा श्रमिक जानकारी पत्रक सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीदी निर्धारित निविदा एवं क्रय प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई।

जांच में यह भी पाया गया कि उस समय जिला पंचायत कांकेर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी के.पी. देवांगन ने जिला स्तर पर केंद्रीयकृत खरीदी कराई, जबकि शासन के नियमों के अनुसार सामग्री खरीदी का अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को स्वतंत्र रूप से प्राप्त था।

क्रय नियमों के उल्लंघन के मिले साक्ष्य

ईओडब्ल्यू की विवेचना में छत्तीसगढ़ पंचायत (सामग्री तथा माल क्रय) नियम, छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम तथा अन्य निर्धारित शासकीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन के साक्ष्य मिले। जांच एजेंसी के अनुसार जिला पंचायत तथा संबंधित जनपद पंचायतों के तत्कालीन अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ और कथित षड्यंत्र के तहत अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय राशि का अपव्यय किया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंची।

इन अधिकारियों को बनाया गया आरोपी

प्रकरण में कुल आठ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ के.पी. देवांगन के अलावा राधाकांत कर, गोवर्धन गजबल्ला, परदेशी राम मरकाम, भारत राम नेताम, रामकिशुन ध्रुव, जी.आर. ठाकुर तथा संवालदास बघेल शामिल हैं। ये सभी संबंधित जनपद पंचायतों में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर कार्यरत थे।

कहां-कितनी मिली आर्थिक अनियमितता

जांच में जिला पंचायत कांकेर में 39,90,252 रुपए तथा सात जनपद पंचायतों में कुल 1,29,23,995 रुपए की अनियमितता सामने आई। इनमें:

  • कोयलीबेड़ा: 51,98,192 रुपए
  • चारामा: 22,92,277 रुपए
  • नरहरपुर: 20,62,847 रुपए
  • अंतागढ़: 19,91,631 रुपए
  • कांकेर जनपद: 7,55,156 रुपए
  • भानुप्रतापपुर: 4,51,592 रुपए
  • दुर्गकोंदल: 1,72,300 रुपए

इस प्रकार कुल कथित अनियमित राशि 1,69,14,247 रुपए रही।

मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से भी दर्ज हैं दो प्रकरण

ईओडब्ल्यू के अनुसार मुख्य आरोपी के.पी. देवांगन के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं शासकीय पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य प्रकरण पहले से दर्ज हैं। इनमें एक मामले में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने तथा दूसरे मामले में लगभग 8.44 करोड़ के कथित लोकधन के दुर्विनियोग के आरोप शामिल हैं। दोनों मामलों में भी न्यायालय के समक्ष अंतिम प्रतिवेदन अथवा चालान पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है।

18 वर्ष बाद न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम

करीब 18 वर्ष पुराने इस मामले में विस्तृत विवेचना के बाद 6,000 पृष्ठों का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया जाना जांच एजेंसी की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब मामले की आगे की सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी, जहां आरोपों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

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