नई दिल्ली। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कानून को और अधिक कठोर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी गई है।
मानसून सत्र में पेश होगा संशोधन विधेयक
सरकार आगामी संसद के मानसून सत्र में इस संशोधन विधेयक को पेश करेगी। हाल के समय में विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों और अभ्यर्थियों की मांगों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है।
पेपर लीक पर होंगे कड़े दंड
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वालों के लिए 10 वर्ष तक के कठोर कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से संगठित पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
विधेयक में पेपर लीक से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का भी प्रस्ताव है। इन अदालतों में मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर होगी और तीन महीने के भीतर फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है।
अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ाने की पहल
सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी तथा ईमानदारी से परीक्षा देने वाले लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा।
छात्रों के प्रतिनिधियों से भी हुई चर्चा
शुक्रवार को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बैठक भी हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी मांगों और सुझावों पर विचार किया। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को अपना मांग पत्र सौंपा। सरकार ने आश्वासन दिया कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।