E20 petrol policy India : नई दिल्ली: भारत में E20 पेट्रोल के सफल क्रियान्वयन के बाद अब इथेनॉल नीति एक नए और क्रांतिकारी युग में कदम रख रही है। देश में इथेनॉल का उत्पादन क्षमता से अधिक होने के कारण अब सरकार इसे केवल गाड़ियों के ईंधन तक सीमित न रखकर रसोई गैस के विकल्प, हवाई जहाज के ईंधन (SAF), निर्यात और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल करने का मास्टरप्लान तैयार कर रही है।
अब एटीएम से मिलेगा खाना पकाने का ईंधन सरकार एक ऐसे अनोखे रिटेल मॉडल पर विचार कर रही है जिसके तहत देश भर में ‘इथेनॉल एटीएम’ स्थापित किए जा सकते हैं। जिस प्रकार लोग एटीएम से पैसे निकालते हैं या वाटर एटीएम से पानी लेते हैं, ठीक उसी तर्ज पर उपभोक्ता इथेनॉल एटीएम से विशेष केन भरकर घर ले जा सकेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य रसोई में एलपीजी (LPG) पर निर्भरता को कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। इसके लिए खास तरह के कुकिंग स्टोव भी डिजाइन किए जा रहे हैं।
क्षमता अधिक, खपत कम: नए बाजारों की तलाश केयरएज रेटिंग्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर को पार कर चुकी है और जल्द ही यह 24 अरब लीटर तक पहुंचने वाली है। इसके विपरीत, वर्तमान में E20 सम्मिश्रण कार्यक्रम और अन्य उद्योगों (फार्मा व शराब) को मिलाकर कुल मांग लगभग 14 से 15 अरब लीटर ही है। ऐसे में लगभग 7 अरब लीटर की अतिरिक्त सरप्लस क्षमता का सही उपयोग करने के लिए सरकार नए रास्ते तलाश रही है।
हवाई सफर और निर्यात पर भी नजर सरप्लस इथेनॉल का सही इस्तेमाल करने के लिए नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को निर्यात करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा, एविशन सेक्टर में भी ‘अल्कोहल-टू-जेट’ तकनीक के जरिए सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने की तैयारी है। विशाखापत्तनम में एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी और जीपीएस रिन्यूएबल्स मिलकर देश का पहला इथेनॉल-टू-जेट फ्यूल प्लांट भी स्थापित कर रहे हैं।
गन्ने के साथ-साथ अब मक्के जैसे अनाज से भी इथेनॉल का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। सरकार की नई नीतियों और CAFE-III नियमों के ड्राफ्ट से यह साफ है कि भारत अब इथेनॉल को केवल एक एडिटिव के रूप में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और प्रमुख ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।