संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने नीट परीक्षा में पेपर लीक और अन्य गंभीर मुद्दों पर चर्चा की मांग शुरू कर दी। राज्यसभा में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। वहीं लोकसभा में भी विपक्षी सांसद हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
कार्यवाही बार-बार स्थगित
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को दिनभर में कई बार स्थगित करना पड़ा। सुबह शुरू हुआ सदन कुछ ही मिनट चल पाया जिसके बाद स्पीकर ने कार्यवाही को दोपहर तक के लिए रोक दिया। स्थिति में सुधार न होने पर सदन की कार्यवाही को बार-बार टालना पड़ा। दूसरी तरफ राज्यसभा की कार्यवाही भी हंगामे की भेंट चढ़ गई और उसे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। कांग्रेस सांसदों का आरोप है कि सरकार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से भाग रही है और वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
कानून मंत्री ने पेश किया नया बिल
इन सबके बीच लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किया गया। देश के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या को चौंतीस से बढ़ाकर अड़तीस करने का प्रस्ताव है। सरकार का यह कदम अदालतों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे में मददगार साबित होगा। सत्र के पहले दिन के तेवर को देखकर यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में संसद के अंदर राजनीतिक गरमी और बढ़ने वाली है।