मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं की संख्या में हर साल उछाल आ रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की नई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 8 सालों में मेडिकल दाखिले के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की तादाद में 50 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। सबसे हैरान करने वाली और खुशी की बात यह है कि इस दौड़ में बेटियां लड़कों से काफी आगे निकल गई हैं।
आंकड़ों में दिखती बदलाव की तस्वीर
साल 2019 में नीट-यूजी परीक्षा के लिए लगभग 15 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, जिनकी संख्या 2026 तक बढ़कर 22.79 लाख तक पहुंच गई है। इन 8 सालों में आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में 7.5 लाख से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। अगर जेंडर के आधार पर देखें, तो 2019 में 8.38 लाख बेटियों ने आवेदन किया था, जो 2026 में बढ़कर 13.32 लाख हो गया है। यानी छात्राओं की संख्या में सीधे 66 प्रतिशत का उछाल आया है, जबकि लड़कों के आवेदन में 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

भाषा की बाधा टूटी, छात्रों को मिली राहत
सरकार की ओर से छात्रों को उनकी अपनी भाषा में पढ़ने का मौका देने की पहल का भी असर दिखने लगा है। पिछले 8 सालों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के जरिए नीट-यूजी देने वाले छात्रों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि अब केवल अंग्रेजी तक सीमित न रहकर, छात्र अपनी मातृभाषा में भी मेडिकल की जटिल पढ़ाई को आसानी से समझ रहे हैं।
परीक्षा के तरीकों में भी बदलाव
अभी तक यह परीक्षा पेन-पेपर यानी लिखित रूप में होती रही है, लेकिन अगले साल से इसे कंप्यूटर आधारित यानी सीबीटी मोड में कराने का निर्णय लिया गया है। इससे परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और गति आने की उम्मीद है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए युवाओं का यह उत्साह बताता है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारत को बड़ी संख्या में नए डॉक्टर मिलने वाले हैं।