अनूप वर्मा, चारामा
चारामा। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत कक्षा पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं मार्च महीने में ही संपन्न हो चुकी हैं। परीक्षा खत्म होने के बाद अप्रैल, मई और जून… यानी पूरे तीन महीने बीत जाने और नया सत्र शुरू होने के बाद भी छात्रों को अंकसूची (मार्कशीट) नहीं मिल पाई थी, जिसे लेकर ‘जनधारा समाचार’ द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। समाचार प्रकाशन के बड़े असर के बाद, आखिरकार मंगलवार (14 जुलाई) को शाम 5:00 बजे तक विकासखंड के सभी स्कूलों में मार्कशीट पहुंचा तो दी गई, लेकिन इसके साथ ही शिक्षा विभाग की एक और शर्मनाक लापरवाही सामने आ गई है।
3 महीने की देरी के बाद भी थमा दीं ‘मिसप्रिंट’ मार्कशीटें
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ब्लॉक स्तर से सभी छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम की सूची तैयार कर काफी पहले ही जिला शिक्षा कार्यालय भेज दी गई थी। जिला स्तर पर अंकसूची तैयार करने के दौरान कई तकनीकी त्रुटियां और प्रिंटिंग मिस्टेक हो रही थीं, जिसके बहाने मार्कशीट आने में इतनी बड़ी देरी की गई। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि तीन महीने का लंबा वक्त लेने और बार-बार री-वेरिफिकेशन का दावा करने के बाद भी विभाग ने जो मार्कशीटें जारी की हैं, वे पूरी तरह त्रुटिपूर्ण हैं।
मार्कशीट में ये गंभीर खामियां आईं सामने
यह किसी एक या दो बच्चों की नहीं, बल्कि चारामा विकासखंड के लगभग सभी स्कूलों में पहुंची अंकसूचियों का हाल है:
- PEN नंबर गायब: सभी मार्कशीटों से बच्चों का बेहद महत्वपूर्ण पर्सनल एजुकेशन नंबर (PEN) ही नदारद (अंकित नहीं) है।
- माता के नाम और सरनेम में भारी गलतियां: कक्षा आठवीं की मार्कशीटों में छात्र-छात्राओं की माता के नाम के सरनेम में भारी गड़बड़ी की गई है। नाम का आधा हिस्सा हिंदी में सही है, तो अंग्रेजी में उसे गलत स्पेलिंग और गलत शब्दों के साथ प्रिंट कर दिया गया है।
पूरे राज्य में सामने आई यह गड़बड़ी, सुधार के लिए वापस मंगाई जा रही हैं मार्कशीटें
इस गंभीर लापरवाही को लेकर जब ‘जनधारा समाचार’ द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो खंड शिक्षा अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की।
वर्जन: खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के. एस. साहू
“मार्कशीटों में माता के नाम के सरनेम में जो मिसप्रिंट की शिकायतें आई हैं, उसे देखते हुए सभी स्कूलों से मार्कशीटों को पुनः वापस मंगाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि इसे उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में सुधार के लिए तुरंत ऊपर भेजा जाए और आगामी दो से तीन दिनों के भीतर त्रुटियों को सुधार कर नई मार्कशीटों का पुनः वितरण सुनिश्चित कर दिया जाए।”
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह गलती केवल जिले स्तर पर हुई है, तो उन्होंने जानकारी दी कि यह मिस्टेक केवल स्थानीय स्तर या जिले की नहीं है, बल्कि इस वर्ष पूरे राज्य में ही इस प्रकार की गड़बड़ी सामने आई है।
अंकसूची का बना मजाक, परिजनों में भारी आक्रोश
एक या दो बच्चों की मार्कशीट में खराबी हो तो उसे मानवीय भूल माना जा सकता है, लेकिन पूरे राज्य और विकासखंड की अंकसूचियों में एक जैसी गंभीर गलतियां होना शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
मार्च में परीक्षा खत्म होने के बाद जुलाई आधा बीत चुका है। जो परिजन अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों, प्राइवेट स्कूलों या अन्य शहरों में कराना चाहते थे, वे पहले ही 3 महीने तक भटकने को मजबूर रहे। अब जब हाथ में मार्कशीट आई भी है, तो वह भी इस कदर त्रुटिपूर्ण है कि उसे कहीं भी जमा करना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने शिक्षा विभाग की इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष व्यक्त किया है तथा मांग की है कि वादे के मुताबिक दो से तीन दिनों के भीतर बिना किसी त्रुटि के सही अंकसूचियां बच्चों को उपलब्ध कराई जाएं।


