भारत में कभी ‘अपना घर’ होना कामयाबी की सबसे बड़ी निशानी माना जाता था, लेकिन आज की युवा पीढ़ी (Millennials और Gen Z) इस पारंपरिक सोच को सिरे से खारिज कर रही है। नोब्रोकर (NoBroker) के हालिया आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जिसके मुताबिक करीब 46% लोग अब मकान खरीदने के बजाय ताउम्र किराए पर रहने को एक स्मार्ट चॉइस मान रहे हैं। इनमें 25 से 34 साल के 53% युवा शामिल हैं, जो होम लोन के 20 साल लंबे चक्रव्यूह में फंसने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों युवाओं का मोह खुद के आशियाने से भंग हो रहा है:
1. EMI बनाम रेंट: गणित समझदारी का
आज के दौर में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे होम लोन की मासिक किश्त (EMI) उसी इलाके के किराए की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है।
- गुरुग्राम में EMI-टू-रेंट रेशियो बढ़कर 2.68 हो चुका है।
- बेंगलुरु (2.38), हैदराबाद (2.47) और मुंबई (2.19) जैसे शहरों का भी यही हाल है।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि जिस आलीशान फ्लैट का किराया ₹50,000 है, उसे खरीदने पर हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा की EMI चुकानी होगी। युवा प्रोफेशनल्स का मानना है कि इतनी भारी-भरकम राशि बैंक को ब्याज के रूप में देने से बेहतर है कि वह पैसा म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में इन्वेस्ट किया जाए, जो भविष्य में ज्यादा वित्तीय सुरक्षा देगा।
2. लाइफस्टाइल और लग्जरी से नो कॉम्प्रोमाइज
आज की जनरेशन किराए के मकान में सिर्फ मजबूरी में नहीं रह रही, बल्कि यह उनका एक सोचा-समझा फैसला है। वे छोटे या साधारण घर में रहने के बजाय प्रीमियम गेटेड सोसाइटी, फुल्ली फर्निश्ड (Fully Furnished) 3-BHK अपार्टमेंट्स और हाई-एंड लाइफस्टाइल को तरजीह दे रहे हैं।
मुंबई जैसे महंगे शहर में कुल रेंटल डिमांड का एक-तिहाई हिस्सा उन घरों का है, जिनका किराया ₹40,000 प्रति महीने से अधिक है। युवा अपना स्टैंडर्ड गिराए बिना आलीशान जिंदगी जीना चाहते हैं, भले ही वह किराए के घर में ही क्यों न हो।
3. करियर में फ्लेक्सिबिलिटी और शहरों का बदलता रेंटल मार्केट
आज का वर्क कल्चर हाइब्रिड है और युवा बेहतर मौकों के लिए तेजी से नौकरियां और शहर बदलते हैं। ऐसे में किसी एक शहर में घर खरीदकर बंध जाना उनके करियर की रफ्तार को रोक सकता है। जब तक भविष्य को लेकर पूरी स्पष्टता न हो, वे किसी एक जगह पर पूंजी नहीं फंसाना चाहते।
युवाओं के इसी रुख के कारण बड़े शहरों का रेंटल मार्केट रिकॉर्ड तेजी से भाग रहा है। सालाना किराए में बढ़ोतरी के मामले में मुंबई (MMR) 11% के साथ सबसे आगे है, जबकि चेन्नई में 8%, बेंगलुरु में 7% और दिल्ली-NCR व हैदराबाद में करीब 3% की वृद्धि दर्ज की गई है। साफ है कि आज की पीढ़ी के लिए ‘फाइनेंशियल फ्रीडम’ और ‘करियर ग्रोथ’ किसी भी ईंट-पत्थर के मकान से कहीं ज्यादा कीमती है।