बेतवा नदी किनारे बना वो किला, जिसे जीतना था नामुमकिन

नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई किले हैं, जो हमारे गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं। इन्हीं में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित मल्हारगढ़ का किला प्रमुख है। यह किला अपनी शानदार वास्तुकला के लिए मशहूर है। इसके साथ ही यहां वीर आल्हा और उनकी पत्नी रानी मछला से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी प्रचलित है।

मल्हारगढ़ किले का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार, बेतवा नदी के किनारे स्थित इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। इसे राजा ज्वाला सिंह ने बनवाया था। इस किले के चारों ओर पत्थरों की मजबूत दीवारें बनाई गई थीं। बेतवा नदी के किनारे होने के कारण, उस समय इसे जीतना बहुत कठिन माना जाता था। किले के भीतर सैन्य बैरक, तोपें रखने की जगह और पानी के लिए बड़े जलाशय मौजूद हैं। हालांकि, सही देखरेख के अभाव में इस ऐतिहासिक धरोहर के कई हिस्से अब जर्जर हो रहे हैं।

वीरान होता ऐतिहासिक खजाना

किले के अंदर बना मछला कुंड यहां का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा है। इसका इतिहास काफी पुराना है, लेकिन आज यह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कुंड की दीवारें धीरे-धीरे ढह रही हैं। इस किले में आज भी कुछ पुरानी तोपें देखने को मिलती हैं। दुख की बात यह है कि स्थानीय चोरियों के कारण पहले मौजूद कई बड़ी तोपें अब यहां से गायब हो चुकी हैं। संरक्षण के अभाव में यह धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रही है।

रानी मछला को क्यों किया गया था कैद

मल्हारगढ़ किले से जुड़ी एक कहानी आज भी लोगों की जुबान पर है। लोक कथाओं के अनुसार, रानी मछला एक बार अपनी सहेलियों के साथ बाग में झूला झूल रही थीं। उसी समय वहां से पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह शिकार करते हुए गुजरे। रानी मछला की खूबसूरती देख राजा उन पर मोहित हो गए। उन्होंने किसी भी तरह रानी को पाने की योजना बनाई और उन्हें कैद कर लिया। इसी घटना के बाद का समय बुंदेलखंड के इतिहास में आल्हा और उदल के वीरतापूर्ण किस्सों से जुड़ गया।

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