नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क। इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर ऑटोमोबाइल बाजार तक ‘E20 पेट्रोल’ (20% एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कई वाहन चालकों का दावा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। इस विवाद पर केंद्र सरकार और ऑटो विशेषज्ञों का रुख थोड़ा अलग है। सरकार का मानना है कि साल 2023 से पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर इसका थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन इसके पर्यावरण और आर्थिक फायदे बहुत बड़े हैं।
ऐसे में आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सच में माइलेज गिरता है, तो सालभर में पेट्रोल का खर्च कितना बढ़ जाएगा? आइए आसान गणित से इसे समझते हैं।
सरकार का क्या है कहना?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों के माइलेज में 3% से 5% तक की मामूली कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि इससे गाड़ियों के इंजन को नुकसान नहीं होता, बल्कि इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर होती है। इसके अलावा, एथेनॉल मिक्स होने से गाड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण काफी कम होता है और भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है, जिससे देश का पैसा बचता है।
सालभर के खर्च का पूरा गणित (एक उदाहरण)
भले ही 5% माइलेज कम होना पहली नजर में छोटा लगे, लेकिन जब आप सालभर का हिसाब जोड़ेंगे, तो यह आंकड़ा आपकी जेब पर असर डालता हुआ दिखेगा। आइए इसे एक एवरेज ड्राइविंग के उदाहरण से समझते हैं:
| विवरण | पहले का गणित | E20 के बाद का अनुमान (5% कमी) |
| रोजाना ड्राइविंग | 50 किलोमीटर | 50 किलोमीटर |
| सालभर की कुल दूरी | 18,250 किलोमीटर | 18,250 किलोमीटर |
| गाड़ी का माइलेज | 20 किमी/लीटर | 19 किमी/लीटर |
| सालाना पेट्रोल की खपत | 913 लीटर | 961 लीटर |
अतिरिक्त खर्च का फाइनल आंकड़ा: इस गणित के हिसाब से आपको सालभर में लगभग 48 लीटर ज्यादा पेट्रोल की जरूरत पड़ेगी। अगर आपके शहर में पेट्रोल की औसत कीमत ₹100 प्रति लीटर है, तो आपकी जेब पर हर साल करीब ₹4,800 का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। यदि पेट्रोल की कीमत ₹100 से अधिक है, तो यह खर्च और ज्यादा हो सकता है।
क्या सिर्फ E20 पेट्रोल ही है विलेन?
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स का कहना है कि माइलेज कम होने के लिए सिर्फ E20 पेट्रोल को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह सही नहीं है। किसी भी गाड़ी का माइलेज कई अन्य जरूरी कारकों पर भी निर्भर करता है, जैसे:
- सड़क की स्थिति और भारी ट्रैफिक।
- कार में लगातार एयर कंडीशनर (AC) का चलना।
- टायरों में हवा का प्रेशर सही न होना।
- ड्राइविंग का तरीका (अचानक ब्रेक लगाना या तेज एक्सीलेटर दबाना)।
- समय पर गाड़ी की सर्विसिंग न होना।
निष्कर्ष: यदि आपकी गाड़ी साल 2023 से पहले की बनी है, तो आपको माइलेज में थोड़ा अंतर दिख सकता है। हालांकि, नई गाड़ियां (E20 कंप्लाइंट) इस ईंधन को बेहतर तरीके से संभाल रही हैं।
डिस्क्लेमर: यह गणना केवल 5% माइलेज घटने के एक अनुमानित उदाहरण पर आधारित है। वास्तविक प्रभाव आपकी गाड़ी के मॉडल, उसकी कंडीशन और आपके चलाने के तरीके के आधार पर अलग हो सकता है।