टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने अब उन कॉल मैनेजमेंट एप्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जो स्पैम और फ्रॉड कॉल्स की पहचान करने का दावा करते हैं। ट्राई ने आईटी मंत्रालय से इन एप्स पर लगाम लगाने की इजाजत मांगी है। इस कदम से ट्रूकॉलर जैसी सेवाओं के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है।

क्या है ट्राई का नया ड्राफ्ट नियम
ट्राई ने एक नया ड्राफ्ट रेगुलेशन तैयार किया है। इसका मुख्य मकसद परेशान करने वाली कॉल्स और फ्रॉड को रोकना है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, कोई भी कॉल मैनेजमेंट एप आम लोगों की निजी बातचीत को न तो टैग कर पाएगा और न ही ब्लॉक कर सकेगा। इसके अलावा, जो नंबर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तय किए गए हैं, उन्हें भी एप्स अपनी मर्जी से नहीं रोक पाएंगे।
इन सर्विस को रहेगी पाबंदी
सरकार ने कुछ खास नंबर सीरीज तय की हैं, जिन्हें बैंक और वित्तीय संस्थान सर्विस कॉल्स के लिए इस्तेमाल करते हैं। ट्राई का कहना है कि 140 सीरीज और 1600 सीरीज से आने वाली इन महत्वपूर्ण कॉल्स को अब कोई भी एप ब्लॉक नहीं कर पाएगा। यह नियम लागू होने के बाद ट्रूकॉलर का काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
ट्रूकॉलर का क्या है कहना
ट्राई के इस प्रस्ताव का ट्रूकॉलर ने कड़ा विरोध किया है। कंपनी का मानना है कि इस तरह के नियमों से उनके एप की मूल उपयोगिता पर असर पड़ेगा। ट्राई की तरफ से जारी ड्राफ्ट रेगुलेशन में स्पष्ट है कि सरकार चाहती है कि स्पैम रोकने के नाम पर कोई भी एप लोगों की सामान्य कॉल्स में दखल न दे।