भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को उनके आक्रामक अंदाज के लिए जाना जाता है। वे मैदान पर विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने के लिए मशहूर थे। इसी वजह से उन्हें प्यार से दादा कहा जाता था। उनके साथ खेल चुके पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने अब दादा से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया है। जाफर के अनुसार गांगुली के पास विरोधी खिलाड़ियों के मन की बात को समझने की गजब की क्षमता थी। वे मनोवैज्ञानिक तरीके से सामने वाली टीम पर दबाव बना देते थे।
हेडिंग्ले टेस्ट 2002 का वह ऐतिहासिक फैसला
वसीम जाफर ने वर्ष 2002 के इंग्लैंड दौरे का एक बड़ा वाकया याद किया है। उस समय भारतीय टीम 4 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने इंग्लैंड गई थी। भारत इस सीरीज में 0-1 से पीछे चल रहा था। सीरीज का तीसरा मुकाबला हेडिंग्ले के मैदान पर खेला जाना था। इंग्लैंड की टीम ने भारत को डराने के लिए पिच पर काफी घास छोड़ दी थी। मेजबान टीम ने अपने 4 तेज गेंदबाजों को टीम में शामिल किया था ताकि वे भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर सकें। लेकिन कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया।
हरी पिच पर पहले बल्लेबाजी का साहसिक निर्णय
दूरदर्शन के द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो में बात करते हुए वसीम जाफर ने इस मैच की अंदरूनी कहानी बताई। जाफर उस ऐतिहासिक मैच में भारतीय टीम के 12वें खिलाड़ी की भूमिका में थे। उन्होंने बताया कि हरी पिच को देखकर हर कोई हैरान था। ऐसे माहौल में सौरव गांगुली ने टॉस जीता और बिना डरे पहले बल्लेबाजी करने का फैसला कर लिया। यह फैसला बहुत जोखिम भरा लग रहा था। लेकिन सौरव गांगुली की कप्तानी का यही अंदाज था। उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने सीधे चुनौती पेश कर दी।
मैदान पर फ्लिंटॉफ और दादा के बीच हुई थी बहस
कप्तान के इस निडर फैसले का भारतीय बल्लेबाजों पर सकारात्मक असर पड़ा। टीम इंडिया ने पहली पारी में 600 से ज्यादा रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इस मैच में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और खुद सौरव गांगुली ने शानदार शतक लगाए थे। सचिन तेंदुलकर ने 193 रनों की जादुई पारी खेली थी। यह टेस्ट इतिहास में पहला मौका था जब इन तीनों दिग्गजों ने एक ही मैच में शतक जड़ा था। जाफर ने बताया कि जब वे मैदान पर ड्रिंक्स लेकर जाते थे, तब उन्होंने देखा कि मैदान का माहौल काफी गर्म था। इंग्लैंड के ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ और सौरव गांगुली के बीच लगातार तीखी बहस हो रही थी। नासिर हुसैन की कप्तानी वाली इंग्लिश टीम पूरी तरह दबाव में आ चुकी थी। भारत ने वह मैच पारी और 46 रनों से जीता था।
स्टीव वॉ को परेशान करने के लिए टॉस में करते थे देरी
वसीम जाफर ने सौरव गांगुली की एक और अनोखी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि दादा सिर्फ इंग्लैंड के खिलाफ ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे मजबूत टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी दिमागी खेल खेलते थे। गांगुली ऑस्ट्रेलिया के महान कप्तान स्टीव वॉ को परेशान करने के लिए जानबूझकर टॉस के समय देर से पहुंचते थे। इससे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और कप्तान झल्ला जाते थे। गांगुली का यह रवैया विरोधी टीम के आत्मविश्वास को हिलाकर रख देता था। इसी आक्रामकता ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर को हमेशा के लिए बदल दिया।