छत्तीसगढ़ की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी को हिलाकर रख देने वाले तीन बड़े घोटालों (शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग) के मुख्य आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने हिरासत में ले लिया है। कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के अध्यक्ष रहे रामगोपाल पिछले 3 साल से फरार चल रहे थे, जिनकी तलाश ईडी (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) को लंबे समय से थी।
बेटे से पूछताछ के तुरंत बाद हुआ सरेंडर
इस पूरे घटनाक्रम में मंगलवार को बड़ा मोड़ आया, जब EOW ने कस्टम मिलिंग घोटाले के सिलसिले में रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल को तलब कर उनसे लंबी पूछताछ की। बेटे पर कसते शिकंजे को देख, लंबे समय से भूमिगत चल रहे रामगोपाल अग्रवाल खुद EOW के दफ्तर पहुंचे, जिसके बाद एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
समझिए क्या हैं ये तीनों महाघोटाले, जिनमें घिरे हैं रामगोपाल अग्रवाल:
जांच एजेंसियों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ के इन तीन सबसे चर्चित घोटालों के केंद्र में रहे हैं:
- शराब घोटाला (अनुमानित राशि: ₹3,200 करोड़)
समय काल: वर्ष 2019 से 2022
क्या है मामला: यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा कथित आर्थिक घोटाला माना जा रहा है। ED और EOW का आरोप है कि सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था के समानांतर एक सिंडिकेट (गुट) बनाकर अवैध रूप से शराब बेची गई, भारी कमीशनखोरी हुई और सीधे सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। इस मामले में कई वरिष्ठ IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और नेता रडार पर हैं।
- कोल लेवी घोटाला (अनुमानित राशि: ₹540 करोड़)
समय काल: वर्ष 2020 से 2022
क्या है मामला: यह मामला कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से जबरन अवैध वसूली से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कोयले के परिवहन पर प्रति टन के हिसाब से एक निश्चित अवैध राशि (लेवी) वसूली जाती थी। इस सिंडिकेट के तार भी बड़े नौकरशाहों, बिचौलियों और रसूखदार राजनेताओं से जुड़े हैं।
- कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला (अनुमानित राशि: ₹127 करोड़)
समय काल: वर्ष 2015 से 2023
क्या है मामला: यह घोटाला धान की मिलिंग के बदले राइस मिलर्स को दी जाने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि में हेराफेरी से जुड़ा है। नियमों को ताक पर रखकर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने और राशि को गलत तरीके से बढ़ाने का आरोप है, जिसके तहत करीब 127 करोड़ रुपये के वारे-न्यारे किए गए।
नोट: जांच एजेंसियों (EOW और ED) की कार्रवाई और अदालती प्रक्रिया अभी जारी है। इन सभी घोटालों और आरोपों पर फिलहाल किसी भी अदालत द्वारा अंतिम न्यायिक मुहर या पुष्टि नहीं की गई है।