बढ़ा विश्व युद्ध का खतरा? ट्रंप ने तोड़ा महा-समझौता, शुरू हुए हमले

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे अंतरिम युद्धविराम समझौते (सीजफायर एग्रीमेंट) को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है। बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने साफ किया कि अब ईरान के साथ इस समझौते का कोई औचित्य नहीं रह गया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे बातचीत के रास्ते खुले रखेंगे, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर तनाव चरम पर पहुंच गया है।

कतर में चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त

वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह अंतरिम युद्धविराम समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से तय हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों को एक स्थायी और शांतिपूर्ण समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय देना था। इस बीच कतर में दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर भी चल रहा था, लेकिन पिछले हफ्ते यह बातचीत किसी भी ठोस नतीजे के बिना ही खत्म हो गई। वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान पर नए सैन्य हमले भी शुरू कर दिए हैं।

नाटो शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप का तीखा हमला

तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया। नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके हिसाब से यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। ट्रंप ने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वे अब ईरान से कोई लेन-देन नहीं चाहते हैं। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को बीमार मानसिकता वाला बताते हुए कहा कि उनके साथ चर्चा में वक्त लगाना सिर्फ समय की बर्बादी है।

अमेरिका ने छीनी बड़ी आर्थिक राहत, तेल बिक्री पर लगाई रोक

सैन्य हमलों के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर बड़ा आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मंगलवार को ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को बेचने की इजाजत देने वाला सामान्य लाइसेंस रद कर दिया है। यह लाइसेंस दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत 22 जून को जारी किया गया था, जिसके जरिए ईरान को 21 अगस्त तक तेल बेचने की कानूनी छूट मिली थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों के बाद अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया है।

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