अमेरिकी सरकार की ओर से टैरिफ यानी आयात शुल्क को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने आया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत सहित करीब 60 देशों के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ सकता है। अमेरिका ने इस मामले पर 3 दिनों की सुनवाई शुरू कर दी है। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि इन देशों में जबरन श्रम से बने सामानों को सप्लाई चेन में आने से रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए गए हैं। भारत ने अमेरिकी व्यापार मंत्रालय के इस कदम पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और जांच को जल्द खत्म करने की मांग की है।

12.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है आयात शुल्क
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि सभा ने प्रस्ताव रखा है कि प्रभावित देशों से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त ड्यूटी यानी एक्स्ट्रा टैक्स लगाया जाए। जांच में दावा किया गया है कि ये देश जबरन श्रम से जुड़ी वस्तुओं के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम रहे हैं। अमेरिका धारा 301 के तहत इन देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। इससे भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक संबंधों और आपसी बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।
असमान प्रतिस्पर्धा को नहीं करेंगे बर्दाश्त
राजदूत जैमीसन ग्रीर का कहना है कि व्यापारिक साझेदार देशों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों को रोकने में असफलता स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर ऐसी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो समान नहीं है। अमेरिका अब इस असमान स्थिति को और अधिक सहन करने के मूड में नहीं है। हालांकि, कुछ देशों ने इस दिशा में प्रारंभिक कदम उठाए हैं, लेकिन अमेरिका इन नियमों को और अधिक सख्ती से लागू करने की तैयारी में है।