अंबुजा विद्या पीठ, रवान में 39वां स्थापना दिवस एवं वन महोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न

अंबुजा विद्या पीठ, रवान मे विद्यालय का 39वां स्थापना दिवस और वन महोत्सव बेहद गरिमामयी, भव्य और ऐतिहासिक तरीके से मनाया गया। इस गरिमामय समारोह में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा, अकादमिक उत्कृष्टता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का बेजोड़ प्रदर्शन किया।
समारोह की शुरुआत पारंपरिक रूप से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ हुई। इसके बाद, उपस्थित सम्मानीय अतिथियों का आदरपूर्वक स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मंच संचालन की कमान विद्यालय की समन्वयक ऊषा पाखोडे ने संभाली। उन्होंने अत्यंत कुशल, जीवंत और प्रवाहमयी शैली में पूरे कार्यक्रम की भूमिका तैयार की। इसके बाद, उनके मार्गदर्शन में विद्यालय की वरिष्ठ कक्षा 12वीं की होनहार छात्रा यशिका वर्मा और अनुजा वाजपेयी ने भी मंच संचालन का दायित्व बेहद संजीदगी और आत्मविश्वास के साथ निभाया। इन छात्राओं की बेहतरीन वाकपटुता और मंच नियंत्रण ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा और खूब तालियां बटोरीं। विद्यालय की सुरक्षा संस्कृति को रेखांकित करते हुए, वरिष्ठ शिक्षक बिप्लव चक्रवर्ती ने ‘सेफ्टी स्पीच’ दिया। उन्होंने छात्रों को दैनिक जीवन, प्रयोगशालाओं, सड़क सुरक्षा और स्कूल परिसर में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने की सीख दी।
विद्यालय के समन्वयक संदीप बसु ने अपने ओजस्वी भाषण में अंबुजा विद्या पीठ के 38 वर्षों के गौरवशाली और गरिमामयी इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटे से पौधे के रूप में शुरू हुआ यह विद्यालय आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने विद्यालय के विकास क्रम, बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों और निरंतर स्थापित किए गए उच्च आदर्शों से सभी को परिचित कराया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में विद्यालय की विकास यात्रा और बच्चों की ऐतिहासिक सफलताओं पर प्रकाश डाला। प्राचार्य पांडे ने बड़े गर्व के साथ बताया कि विगत 38 वर्षों में इस संस्थान ने केवल शिक्षार्थी ही नहीं, बल्कि देश के कर्णधार तैयार किए हैं। आज यहाँ से पढ़कर निकले छात्र सफल डॉक्टर, कुशल इंजीनियर, उच्च पदों पर आसीन प्रशासनिक अधिकारी और सफल उद्यमी बनकर देश और विदेश में अपनी बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं और अंबुजा विद्या पीठ का मान पूरी दुनिया में बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं, खेलकूद और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में वर्तमान छात्र-छात्राओं द्वारा हासिल की गई ऐतिहासिक सफलताओं और कीर्तिमानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों की इस सफलता का श्रेय उनकी कड़ी मेहनत, शिक्षकों के सही मार्गदर्शन और अभिभावकों के अटूट विश्वास को दिया।
इस गौरवशाली अवसर पर पूरा परिसर उस समय हर्ष और गर्व की तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जब विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय को उनके उत्कृष्ट नेतृत्व, दीर्घकालीन शैक्षणिक सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए ‘एक्सेप्शनल अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार मिलना न केवल प्राचार्य के लिए बल्कि पूरे अंबुजा विद्या पीठ परिवार के लिए गर्व का क्षण रहा। इस दौरान उपस्थित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं और बच्चों ने करतल ध्वनि से प्राचार्य का अभिनंदन किया।
कक्षा 10वीं के मेधावी छात्र मनवीर सिंह चावला ने ‘पर्यावरण’ के अवसर पर अत्यंत प्रभावशाली भाषण दिया।
स्थापना दिवस के अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता एक भावपूर्ण ‘समूह गान’ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद छात्रों ने ‘हिंदी लघु नाटिका’ और ‘समूह नृत्य’ की ऐसी शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों का आत्मविश्वास और अनुशासन साफ झलक रहा था।
समारोह का मुख्य आकर्षण ‘पुरस्कार वितरण’ समारोह रहा। शैक्षणिक सत्र, खेलकूद, कला और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में विद्यालय का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मंच पर पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अपनी सफलताओं पर पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिल ।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में, विद्यालय के उप प्राचार्य पद्माकर मिश्रा ने ‘धन्यवाद ज्ञापन’ प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, मंच संचालक छात्राओं और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद स्कूल एंथम और राष्ट्रगान के सम्मान में सभी गरिमापूर्वक खड़े हुए।
समारोह का समापन ‘वन महोत्सव’ के तहत मुख्य परिसर में किए गए भव्य पौधारोपण के साथ हुआ। प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय, उप प्राचार्य , समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं और कक्षा 12वीं के वरिष्ठ छात्र-छात्राओं ने मिलकर औषधीय और छायादार पौधों का रोपण किया और पर्यावरण को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया।

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