नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव की तैयारियों में जुटी है, लेकिन पार्टी की अंदरूनी लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। गुटबाजी को खत्म करना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

चुनावी टीम में संतुलन बनाने की कोशिश नाकाम
कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के बड़े नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी देकर सबको खुश करने की कोशिश की थी। इसके बाद भी नेताओं की नाराजगी दूर नहीं हो रही है। चुनावी टीम के गठन के बाद विवाद और बढ़ गया है।
सांसद मनीष तिवारी ने जताया गुस्सा
पंजाब कांग्रेस की नई चुनावी टीम का एलान बुधवार को हुआ था। इसके अगले ही दिन वरिष्ठ नेता और चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने अपनी अनदेखी पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने टीम के चयन पर तंज कसते हुए इसकी काबिलियत पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर छलका दर्द
मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि काबिल होना ही अपने आप में एक बड़ी कमी है। उन्होंने लिखा कि काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं के डर को दूर करने का कोई तरीका होता। मनीष तिवारी ने आगे लिखा कि कांग्रेस ने पिछले 45 सालों में उन्हें बहुत कुछ दिया है और उन्होंने भी अपनी पूरी जवानी पार्टी की सेवा में लगा दी। आगे जो होना है, वह होकर रहेगा।
चंडीगढ़ का सांसद होने का मिला तर्क
पार्टी के बड़े सूत्रों का कहना है कि मनीष तिवारी की अनदेखी नहीं की गई है। वह चंडीगढ़ से सांसद हैं, इसीलिए उन्हें पंजाब की चुनावी टीम में जगह नहीं मिली है। दूसरी तरफ मनीष तिवारी के करीबियों ने इस दलील को गलत बताया है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और तिवारी की राजनीति हमेशा पंजाब से जुड़ी रही है। पंजाब चुनाव में कांग्रेस वापसी की उम्मीद कर रही है, लेकिन नेताओं की आपसी लड़ाई ने उसकी चिंता बढ़ा दी है।