गरीबों के आशियाने उजाड़ने पर भड़के सांसद बृजमोहन

रायपुर जिले के ग्राम नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। इस पूरे मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने करीब एक वर्ष पहले ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक गोपनीय पत्र लिखकर इस निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। सांसद ने न केवल इस कार्रवाई को अमानवीय बताया, बल्कि गरीबों के आशियाने उजाड़ने के बजाय किसी वैकल्पिक स्थान पर कॉलोनी बनाने की वकालत भी की थी।

नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के जरिए समझिए कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री के सामने क्या दलीलें रखी थीं:

  1. 80 परिवारों की बेदखली पर जताई कड़ी आपत्ति
    सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत नकटी (विकासखंड धरसीवां) के खसरा नंबर 460 (रकबा 46.4790 हेक्टेयर) की जिस भूमि पर हाउसिंग बोर्ड विधायक कॉलोनी बनाना चाहता है, वहां पिछले कई दशकों से 80 से अधिक गरीब परिवार रह रहे हैं। प्रशासन द्वारा इन परिवारों को बेदखल करने के लिए जो नोटिस जारी किए गए हैं, सांसद ने उसे पूरी तरह अमानवीय और संवेदनहीन करार दिया।
  2. पूर्वजों की चरागाह भूमि पर निर्माण का विरोध
    पत्र में धरसीवां के पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल के एक ज्ञापन का हवाला भी दिया गया है। इसके अनुसार:

विवादित खसरा नंबर 460 की जमीन को गांव के पूर्वजों ने जनहित में चरागाह के रूप में सुरक्षित रखा था।

ग्रामीण इस ऐतिहासिक और पर्यावरण के लिहाज से जरूरी जमीन को बचाने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

  1. सरकारी योजना के मकान और आंगनबाड़ी भी जद में
    बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए लिखा कि इस जमीन पर रहने वाले लोग कोई अतिक्रमणकारी नहीं हैं, बल्कि वे पंचायत की व्यवस्था के तहत सालों से वहां बसे हैं।

बड़ी बात: इस बस्ती में केवल लोगों के घर ही नहीं हैं, बल्कि सरकार की ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बने हुए हैं। इसके अलावा यहां आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन और कई अन्य शासकीय इमारतें भी मौजूद हैं, जिन्हें इस परियोजना के लिए तोड़ा जाना प्रस्तावित है।

  1. ग्रामीणों की मांग: ‘वैकल्पिक स्थान तलाशें सरकार’
    सांसद ने पत्र में ग्रामीणों की मांग का पुरजोर समर्थन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि या तो विधायक कॉलोनी का निर्माण इस खसरे की बची हुई खाली जमीन पर किया जाए, या फिर सरकार किसी दूसरे उपयुक्त स्थान का चयन करे, ताकि लंबे समय से मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे इन 80 गरीब परिवारों को विस्थापन का दंश न झेलना पड़े।

यथास्थिति बनाए रखने और पुनर्विचार की मांग
अपने पत्र के समापन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस संवेदनशील मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। उन्होंने मांग की थी कि:

नकटी में चल रही बेदखली की कार्रवाई और विधायक कॉलोनी के निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए।

जब तक इस मामले का कोई सर्वमान्य हल नहीं निकल जाता, तब तक वहां यथास्थिति (Status Quo) बहाल रखी जाए।

सांसद ने सरकार को सुशासन का मंत्र देते हुए लिखा कि विकास कार्य बेशक जरूरी हैं, लेकिन किसी भी विकास के फैसले में स्थानीय गरीबों के अधिकारों, उनकी आजीविका और सामाजिक हितों की बलि नहीं चढ़ाई जानी चाहिए। अब इस पत्र के सामने आने के बाद देखना होगा कि साय सरकार इस पूरी परियोजना को लेकर क्या नया रुख अपनाती है।

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